चित्तौड़गढ़ के किसानों ने जाना एकीकृत कृषि प्रणाली व प्रसंस्करण का महत्व, MPUAT में प्रशिक्षण संपन्न

उदयपुर व्यूज़ | ताजा खबरें

उदयपुर, 06 अक्टूबर 2026। महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, उदयपुर के राजस्थान कृषि महाविद्यालय स्थित हाईटेक यूनिट में डीएसटी प्रायोजित परियोजना के अंतर्गत एकीकृत कृषि प्रणाली, कृषि उत्पादों के प्रसंस्करण एवं ग्रेडिंग विषय पर आयोजित दो दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आज सफलतापूर्वक समापन हुआ।

कार्यक्रम के आयोजन सचिव एवं विभागाध्यक्ष, उद्यानिकी विभाग, राजस्थान कृषि महाविद्यालय, डॉ. कपिल देव आमेटा ने प्रशिक्षण की रूपरेखा एवं विभिन्न गतिविधियों के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। डॉ. आमेटा ने बताया कि वर्तमान समय में किसानों की आय एवं कृषि की स्थिरता बढ़ाने के लिए केवल एक फसल पर निर्भर रहने के बजाय एकीकृत कृषि प्रणाली को अपनाना अत्यंत आवश्यक है। एकीकृत कृषि प्रणाली में फसल उत्पादन के साथ पशुपालन, उद्यानिकी, कृषि वानिकी, मशरूम उत्पादन, मधुमक्खी पालन, प्रसंस्करण एवं अन्य कृषि आधारित गतिविधियों को जोड़कर उपलब्ध संसाधनों का अधिकतम उपयोग किया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि कृषि उत्पादों का प्रसंस्करण, ग्रेडिंग एवं मूल्य संवर्धन किसानों को अपने उत्पाद का बेहतर मूल्य प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने प्रशिक्षणार्थियों को वैज्ञानिक तकनीकों को अपने खेतों पर अपनाने तथा अन्य किसानों तक भी इन तकनीकों को पहुंचाने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम के समापन समारोह के मुख्य अतिथि निदेशक प्रसार शिक्षा डॉ. आर. एल. सोनी ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि कृषि क्षेत्र में बढ़ती लागत एवं बदलती जलवायु परिस्थितियों के बीच किसानों के लिए विविधीकृत एवं संसाधन-कुशल कृषि प्रणाली अपनाना समय की आवश्यकता है। उन्होंने किसानों को उपलब्ध स्थानीय संसाधनों का प्रभावी उपयोग करते हुए कृषि के साथ प्रसंस्करण एवं मूल्य संवर्धन गतिविधियों को जोड़ने पर जोर दिया और कहा की यदि किसान प्राथमिक प्रसंस्करण एवं ग्रेडिंग की तकनीकों को अपनाएं तथा बाजार की मांग के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण उत्पाद तैयार करें, तो कृषि से होने वाली आय में उल्लेखनीय वृद्धि की जा सकती है।

डॉ. आदर्श शर्मा ने बताया की  दो दिवसीय प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को एकीकृत कृषि प्रणाली के विभिन्न घटकों, फसल एवं उद्यानिकी आधारित उत्पादन, कृषि उत्पादों की प्राथमिक प्रसंस्करण तकनीक, वैज्ञानिक ग्रेडिंग, मूल्य संवर्धन, उत्पाद की गुणवत्ता एवं बाजारोन्मुखी कृषि से संबंधित जानकारी दी गई। प्रशिक्षण में प्रतिभागियों को व्यावहारिक, प्रायोगिक एवं तकनीकी जानकारी प्रदान करने के साथ-साथ कृषि आधारित विभिन्न गतिविधियों से अतिरिक्त आय अर्जित करने के संभावित अवसरों पर भी चर्चा की गई। प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण को उपयोगी एवं व्यवहारिक बताते हुए कहा कि इससे उन्हें कृषि उत्पादन के साथ-साथ प्रसंस्करण, ग्रेडिंग एवं मूल्य संवर्धन के माध्यम से अतिरिक्त आय के नए अवसरों की जानकारी मिली है। प्रशिक्षण कार्यक्रम में चित्तौड़गढ़ जिले से चयनित 20 महिला एवं पुरुष कृषकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

By Udaipurviews

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