सुख-दुःख से परे आस्था और साधना से आत्मा के विकास का मार्गःसाध्वी विद्युतप्रभा श्रीजी
उदयपुर, 27 सितंबर। दादावाड़ी में आयोजित आध्यात्मिक चातुर्मास की सतत प्रवचन श्रृंखला में गुरुवर्या बहिन म.सा. डॉ. श्री विद्युतप्रभा श्रीजी ने आत्मविकास एवं मोक्षमार्ग पर प्रेरणादायी विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि भगवान महावीर के शासनकाल में प्राप्त मानव जीवन को सार्थक बनाने के लिए व्यक्ति को निरंतर आध्यात्मिक अभ्यास करते हुए अपनी आत्मा के विकास का प्रयास करना चाहिए।
साध्वीश्री ने कहा कि जीवन यात्रा का उद्देश्य केवल सुखों से परिपूर्ण होना नहीं है और न ही दुखों से पूरी तरह दूर भागना। जीवन में आने वाली परिस्थितियों को समभाव से स्वीकार करते हुए आस्था, विश्वास और साधना के माध्यम से निरंतर आत्मिक विकास की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।
उन्होंने श्रेणिक महाराजा और कुमारपाल के जीवन प्रसंगों का उदाहरण देते हुए बताया कि दृढ़ आस्था, सतत साधना और आध्यात्मिक पुरुषार्थ से व्यक्ति अपने जीवन को मोक्षमार्ग की ओर अग्रसर कर सकता है। उन्होंने श्रद्धालुओं से धर्म एवं साधना को जीवन का नियमित हिस्सा बनाने का आह्वान किया।
प्रवचन में बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाओं ने उपस्थित होकर धर्मलाभ लिया। आयोजकों ने बताया कि सोमवार, 28 सितंबर से पुनः लक्की ड्रा खोला जाएगा। सभी धर्मानुरागी श्रावक-श्राविकाओं से अधिक से अधिक संख्या में दादावाड़ी पहुंचकर प्रवचन श्रवण एवं धर्मलाभ लेने का आग्रह किया गया।
आस्था और साधना से आत्मा का सतत विकास
