उदयपुर। जैन विश्व भारती, लाडनूं में आचार्य श्री महाश्रमण के पावन सान्निध्य में दृढ़संकल्पी शासन सेवी स्वर्गीय भंवरलाल कर्णावट की स्मृति में प्रतिष्ठित ‘बोधि सम्मान’ समारोहपूर्वक प्रदान किया गया। वर्ष 2025 एवं 2026 के लिए राजसमंद निवासी पद्मचंद पटावरी एवं पाली निवासी वरिष्ठ साहित्यकार विजय कृष्ण नाहर को सम्मानित किया गया।
धर्मसभा में आचार्यश्री महाश्रमण ने कहा कि आगम वांग्मय में चारित्र बोधि, ज्ञान बोधि और दर्शन बोधि का महत्वपूर्ण वर्णन मिलता है। आचार्य भिक्षु को आगम-सम्मत साध्वाचार के संबंध में राजनगर में बोध प्राप्त हुआ था। उन्होंने कहा कि स्वर्गीय भंवरलाल कर्णावट तुलसी युग के दृढ़ संकल्पी श्रावक थे। उनके द्वारा निर्मित तुलसी साधना शिखर एव उनका 75 दिन का संथारा अपने आप में एक इतिहास है।
आचार्य प्रवर ने कहा कि मनुष्य को ज्ञान, दर्शन और चारित्र बोधि की आराधना करते हुए अपने जीवन को सार्थक बनाना चाहिए। उन्होंने सभी को सुलभ बोधि प्राप्त करने की प्रेरणा दी।
इस अवसर पर वरिष्ठ साहित्यकार विजय कृष्ण नाहर द्वारा रचित पुस्तक ‘प्रज्ञा पुरुष जयाचार्य’ का आचार्यश्री महाश्रमण के सान्निध्य में लोकार्पण किया गया। समाजसेवी लक्ष्मणसिंह कर्णावट के नेतृत्व में उदयपुर राजसमन्द के 25 लोगों का एक प्रतिनिधि मण्डल लाडंनू गया था।
समारोह में हजारों श्रावक-श्राविकाओं के साथ अमरचंद लूंकड़, बच्छराज दुगड़, प्रो. धर्मचन्द जैन,सूर्यप्रकाश मेहता, राजकुमार दक, बलवंत रांका, इंदरमल हिंगड़, सोभागचंद नाहर, कमल कर्णावट सहित अनेक गणमान्यजन उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन लक्ष्मणसिंह कर्णावट ने किया।
लाडनूं: आचार्य महाश्रमण के सान्निध्य में पटावरी व नाहर को ‘बोधि सम्मान’
