उदयपुर। शहर में 9 से 12 अप्रैल 2026 तक आयोजित चार दिवसीय सेठ विजडम वर्कशॉप एवं ध्यान महोत्सव का सफलतापूर्वक समापन हुआ। आध्यात्मिकता एवं प्राकृतिक जीवनशैली पर आधारित इस विशेष आयोजन में देशभर से आए साधकों ने भाग लेकर आत्मिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा और स्वस्थ जीवन के नए आयामों का अनुभव किया।
कार्यक्रम के दौरान समग्रम इको पिरामिड, शोभागपुरा के संस्थापक डॉ. निहाल जैन ने बताया कि आयोजन का मुख्य उद्देश्य जनमानस को प्रकृति एवं आध्यात्मिक गतिविधियों से जोड़ना रहा। इस दौरान समग्रम इको पिरामिड, शोभागपुरा के साथ-साथ फतेहसागर पाल, मांझी का मंदिर और पिछोला झील जैसे रमणीय एवं प्राकृतिक स्थलों पर सामूहिक ध्यान सत्र आयोजित किए गए, जिनसे प्रतिभागियों को मानसिक शांति एवं सकारात्मक ऊर्जा का विशेष अनुभव हुआ।
महोत्सव का प्रमुख आकर्षण बाठेड़ा स्थित डिवाइन इवो-वैली में आयोजित गतिविधियां रहीं। यहां पिरामिड ध्यान, नेचर वॉक, मिट्टी स्नान (मड बाथ), झरने में स्नान, सन-गेजिंग तथा प्राकृतिक वातावरण में आध्यात्मिक चर्चाएं आयोजित की गईं। इन सत्रों ने प्रतिभागियों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
कार्यक्रम के सफल संचालन में ब्रह्म ऋषि प्रेमनाथ जी, मीनू मैडम, ज्योत्सना मैडम एवं विजय खरे का विशेष योगदान रहा। चारों दिन प्रतिभागियों को पूर्णतः प्राकृतिक, बिना घी-तेल एवं बिना पकाए (रॉ फूड) सात्विक भोजन परोसा गया, जिसने शरीर को शुद्ध, ऊर्जावान और स्वस्थ बनाए रखने का संदेश दिया। इस अनूठी भोजन व्यवस्था को प्रतिभागियों ने विशेष रूप से सराहा।
जयपुर से आए विशेषज्ञ अमित श्रीवास्तव ने वैज्ञानिक पद्धति से ओरा स्कैनिंग कर प्रतिभागियों को उनके चक्र स्वास्थ्य की जानकारी दी एवं सात चक्रों को संतुलित करने के उपाय बताए। वहीं भावना जी ने कर्म सिद्धांत पर अपने प्रेरणादायक व्याख्यान से साधकों को जीवन के गूढ़ पहलुओं से अवगत कराया।
इस महोत्सव में जोधपुर, जयपुर, अहमदाबाद, रतलाम, रांची सहित विभिन्न शहरों से आए प्रतिभागियों ने अपने अनुभव साझा कर कार्यक्रम को और अधिक जीवंत बना दिया। आयोजकों के अनुसार, इस प्रकार के आध्यात्मिक एवं प्राकृतिक जीवनशैली पर आधारित आयोजन समाज में सकारात्मक बदलाव लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों ने भविष्य में भी ऐसे आयोजनों की निरंतरता बनाए रखने का संकल्प लिया।
