अखिल भारतीय नववर्ष समारोह समिति
फतहसागर पाल पर गूंजा वंदे मातरम्, झीलों की नगरी हुई देशभक्ति से ओतप्रोत
आज (18 मार्च) एकलिंग जी से गणगौर घाट तक निकलेगी समग्र सनातन शक्ति ज्योति कलश संस्कृति चेतना यात्रा
गणगौर घाट पर भव्य गंगा आरती के साथ विदा होगा सम्वत् 2082
उदयपुर 17 मार्च। लोक संस्कृति से सराबोर मेवाड़ की आन-बान-शान पगड़ीयों से फतहसागर सप्तरंगी नजर आ रहा था। छोटा हो या बड़ा हर एक के सिर पर पगड़ी थी। फतेहसागर की लहरे भी वन्देमातरम गा रही थी। झीलों की नगरी देशभक्ति से ओतप्रोत थी। अवसर था नव संवत्सर कार्यक्रम अन्तर्गत अखिल भारतीय नववर्ष समारोह समिति द्वारा उदयपुर विकास प्राधिकरण के सहयोग से फतहसागर देवाली छोर ( गेट के अन्दर ) आयोजित राष्ट्रीय एकता का महानाद वंदे मातरमम गान ( 150 वर्ष पूर्ण होने पर ) और भारतीय परिधान उत्सव, पगड़ी सजाओं की प्रस्तुतियों का। कार्यक्रम की अध्यक्षता अखिल भारतीय नववर्ष समारोह समिति के राष्ट्रीय सचिव डाॅ. प्रदीप कुमावत ने की। मुख्य अतिथि फूलसिंह मीणा उदयपुर ग्रामीण विधायक थे।
इस अवसर पर अखिल भारतीय नववर्ष समारोह समिति के राष्ट्रीय सचिव डाॅ. प्रदीप कुमावत ने सभी को सम्बोधित करते हुवे कहा कि वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में फतेहसागर के किनारे सामूहिक वंदे मातरम् गान का आयोजन किया गया। आम जन को राष्ट्र भक्ति का राष्ट्र प्रेम का संदेश वंदे मातरम् गायन के साथ दिया गया। राष्ट्रीय आंदोलन के रूप में जिसे एक महामंत्र के माध्यम समझा जा सकता और वह महामंत्र वंदे मातरम है। बंकिम चंद्र चटर्जी द्वारा रचित वन्दे मातरम् जिसे राष्ट्रगीत के रूप में मान्यता प्राप्त है इसमें विभिन्न संस्थाओं, स्कूल के छात्र-छात्राएं, सांस्कृतिक समितियों के प्रतिनिधि और आमजन ने भाग लिया। भारत माता के चित्र पर माल्यार्पण किया गया। .
ऐतिहासिक फ़तेहसागर झील के किनारे पर देशभक्ति का अनुपम दृश्य देखने को मिला, जहाँ लहरों की मधुर सरगम मानो “वंदे मातरम्” का गान कर रही थी। सजे-धजे रंग-बिरंगी पगड़ियों ने मेवाड़ की आन, बान और शान को सजीव रूप में प्रस्तुत किया, जिसने न केवल नगरवासियों बल्कि दूर-दराज़ से आए पर्यटकों का भी मन मोह लिया। इस विशेष अवसर पर डॉ प्रदीप कुमावत द्वारा रचित “मेवाड़ की आन बान शान हमारी पगड़ी” गीत का भव्य लोकार्पण भी किया गया, जिसने समारोह को और अधिक गरिमामय बना दिया।
संयोजक निश्चय कुमावत ने बताया कि उदयपुर विकास प्राधिकरण के सहयोग से अपना देश अपना वेश के अन्तर्गत पारम्परिक वेशभूषा के साथ पगड़ी सजाओं का आयोजन किया गया जिसमें सभी ने उत्साह से भाग लिया।
पगड़ी सजाओं में 12 वर्ष से कम उम्र के सभी बच्चों को जो पगड़ी पहनकर आए उनको प्रमाण पत्र देकर पुरस्कार दिये गये।
इस अवसर पर अतिथियों द्वारा मशाल प्रजवलित कर कार्यक्रम का शुभारम्भ किया गया। राजस्थान नृत्य की सुन्दर प्रस्तुतिया दी गई। क्रिएशन ग्रुप द्वारा रेम्प वॉक किया गया। आलोक फतेहपुरा की बालिकाओं द्वारा कालबेलिया नृत्य की सुन्दर प्रस्तुति दी गई। कथक आश्रम की बालिकाओं द्वारा कथक नृत्य की प्रस्तुति दी गई। आलोक पंचवटी की छात्राओं द्वारा राजस्थानी नृत्य की प्रस्तुति दी गई। आलोक हिरण मगरी की बालिकाओं द्वारा क्लासिकल नृत्य की प्रस्तुति दी गई।
इस अवसर पर कृष्ण कान्त कुमावत, यशवंत पालीवाल, कमलेन्द्र सिंह पवार, शिव सिंह सोलंकी, नारायण सिंह सिसोदिया,जगदीश अरोड़ा, वीरेंद्र पालीवाल, शशांक टांक, प्रतीक कुमावत, नारायण चौबीसा, मनमोहन भटनागर, राजेश शर्मा संजीव भारद्वाज, मनीष तिवारी, जितेश कुमावत, लव वर्मा, रमेश चौधरी सहित गणमान्य उपस्थित थे।
18 मार्च एकलिंग जी से गणगौर घाट तक निकलेगी समग्र सनातन शक्ति ज्योति कलश संस्कृति चेतना यात्रा
गणगौर घाट पर भव्य गंगा आरती के साथ होगा विदा 2082
अखिल भारतीय नववर्ष समारोह समिति के राष्ट्रीय सचिव डाॅ. प्रदीप कुमावत ने बताया कि विक्रम संवत को पिछले 40 वर्षो से जिस प्रकार पारम्परिक रूप से विदा किया जा रहा उसी के अनुरूप पिछोला के किनारे भव्य रूप से पवित्र गंगा जल प्रवाहित कर और भव्य गंगा आरती के साथ विदा किया जायेगा।
गंगा आरती से पूर्व एकलिंग जी से अपरान्ह 3.15 बजे गणगौर घाट तक भव्य समग्र सनातन शक्ति ज्योति कलश संस्कृति चेतना यात्रा निकलेगी। एकलिंग से प्रारम्भ होकर समग्र सनातन शक्ति ज्योति कलश संस्कृति चेतना यात्रा अम्बेरी, अरिहंत, सनाढ्य मार्बल, राधिका पैलेस, शुभ विनायक मार्बल, सुखेर चोराहें पर, भुवाणा, सेलेब्रेशन माॅल, आर के सर्किल, पुला, फतेहपुरा चोराहा, सुखाड़िया सर्कल, राॅयल मोर्टस, पंचवटी, चेटक होते हुये हाथीपोल पहुँचेगी। पूरे मार्ग में जगह-जगह सर्व समाज, संगठनों द्वारा भव्य स्वागत किया जायेगा। हाथीपोल से घंटाघर होते हुये जगदीश मंदिर पहुँचेगी। जगदीश चोक पर विप्र फाउण्डेशन के तत्वाधान में भव्य संध्या आरती की जायेगी। जगदीश मंदिर प्रांगण में सप्त ज्योतियों का समागम किया जायेगा जो गणगौर घाट पहुँचेगी। गणगौर घाट पर भव्य नृत्य सांस्कृतिक प्रस्तुतिया भी दी जायेगी। गणगौर घाट पर विक्रम संवत 2082 को विदा किया जायेगा।
