गुलाल, फूल और भक्ति से सराबोर हुआ झूलेलाल मंदिर, महिलाओं ने मनाया भव्य फागोत्सव

राधा-कृष्ण संग भगवान झूलेलाल को रंग-अबीर अर्पित, सिंधी समाज ने खेली होली
नाथद्वारा सराय में फागोत्सव की धूम, पुष्प वर्षा और सिंधी मिठाइयों से सजा उत्सव
भजन-नृत्य और गुलाल की बौछार, झूलेलाल मंदिर में उमड़ा श्रद्धा का रंगीन सैलाब

भीलवाड़ा, मूलचन्द पेसवानी
नाथद्वारा सराय स्थित झूलेलाल मंदिर गुरुवार को रंगों, गुलाल और फूलों की खुशबू से सराबोर हो उठा। सिंधी समाज की झूलेलाल महिला मंडली ने मथुरा-वृंदावन और बरसाना की तर्ज पर राधा-कृष्ण एवं भगवान झूलेलाल संग भव्य फागोत्सव मनाया। मंदिर प्रांगण में जैसे ही गुलाल-अबीर की फुहार उड़ी और पुष्प वर्षा हुई, पूरा वातावरण भक्ति और उल्लास के रंगों में रंग गया।
सिंधी समाज के मीडिया प्रभारी मूलचंद बहरवानी ने बताया कि पूज्य हेमराज मल साहब सेवा समिति के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम का शुभारंभ दादी भगवंती भगत के नेतृत्व में हुआ। सपना झूरानी, कोमल चावला, सीमा भगत, रानी कलवानी, भारती भगत, सुशीला लखानी, कोमल थावानी, विद्या फुलवानी, सरिता केवलानी, रुक्मणि जेठानी, कोमल भगत, माया जेठानी, भारती भगत सहित सैकड़ों महिलाओं ने सर्वप्रथम भगवान झूलेलाल की प्रतिमा को गुलाल और अबीर अर्पित कर पुष्प चढ़ाए तथा होली का फागोत्सव मनाया। भजनों की मधुर धुनों के बीच महिलाओं ने पारंपरिक फाग गीत गाए, जिससे मंदिर परिसर में भक्तिरस घुल गया।
कार्यक्रम के दौरान पारंपरिक सिंधी व्यंजन गीयर, रोट प्रसाद की कुटी, रेवड़ी सहित अन्य मिठाइयों का भोग लगाया गया और बाद में श्रद्धालुओं में वितरित किया गया। प्रसाद वितरण के समय आपसी प्रेम, भाईचारे और सामाजिक एकता का सुंदर दृश्य देखने को मिला। रंगों से सराबोर चेहरे और मुस्कान से भरे मन इस उत्सव की पहचान बने।
महिला श्रद्धालुओं ने आकर्षक नृत्य प्रस्तुत कर भगवान राधा-कृष्ण का आव्हान किया। ढोलक और मंजीरों की ताल पर थिरकती महिलाओं ने भक्तिमय नृत्य से समां बांध दिया। इस अवसर पर मंदिर को विशेष रूप से फूलों और रंगीन सजावट से सजाया गया था, जिससे पूरा परिसर वृंदावन की छवि प्रस्तुत करता नजर आया।
फागोत्सव का उद्देश्य केवल रंगों का पर्व मनाना ही नहीं, बल्कि समाज में प्रेम, सौहार्द और सांस्कृतिक परंपराओं को जीवंत रखना भी रहा। कार्यक्रम में उपस्थित श्रद्धालुओं ने कहा कि ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का कार्य करते हैं। झूलेलाल मंदिर में आयोजित यह फागोत्सव सिंधी समाज की धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक एकता का प्रतीक बनकर उभरा। समापन अवसर पर आयोजकों ने सभी महिला श्रद्धालुओं और सहयोगियों का आभार जताया तथा आगामी वर्षों में भी इसी उत्साह और श्रद्धा से फागोत्सव मनाने का संकल्प लिया। मंदिर परिसर से जब गुलाल की अंतिम फुहार उड़ी और भजन की अंतिम तान गूंजी, तब हर चेहरे पर यही भाव थाकृरंगों के साथ-साथ दिल भी रंग गए।

By Udaipurviews

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