250 से अधिक प्रतिभागियों ने की शिरकत
भारतीय मूल्यों की पुनस्र्थापना करने का जिम्मा शिक्षकों पर – प्रो. सारंगदेवोत
पूर्व छात्र संस्था की विरासत एवं धरोहर …….
उदयपुर 03 अगस्त / जनार्दन राय नागर राजस्थान विद्यापीठ डीम्ड टू बी विश्वविद्यालय के संगठक लोकमान्य तिलक शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय की ओर से शनिवार को महाविद्यालय के 59 वें स्थापना दिवस पर एल्युमिनाई मीट 2024 का आयोजन महाविद्यालय के सभागार में किया गया। कार्यक्रम का आरंभ एलुमनाई अध्यक्ष विजय राज शक्तावत के स्वागत उद्बोधन से हुआ। आयोजन समन्वयक डॉ. बलिदान जैन ने कार्यक्रम की विस्तृत रूपरेखा प्रस्तुत की। महाविद्यालय के विविध विभागों से प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके 250 से अधिक पूर्व प्रशिक्षणार्थियों की उपस्थिति में आयोजित एलुमनाई मीट की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. एस.एस. सारंगदेवोत ने कहा कि पूर्व छात्र संस्था की विरासत एवं धरोहर है। उन्होंने कहा कि शिक्षक केवल शिक्षक ही नहीं जबकि वह जीवन मूल्यों का बीजारोपण करने के साथ समाज व राष्ट्र दायित्वों को सीखाने वाला वो आधार स्तम्भ है जिसके बिना एक समाज की कल्पना नहीं की जा सकती। वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए भारतीय मूल्यों की पुनस्र्थापना करने की जरूरत है जिसका जिम्मा शिक्षकों के कंधों पर है।
पुरातन छात्रों धवल आमेटा, धीरेन्द्र सिंह, नरेश , अर्जुन विश्नोई, भगवान सुखवाल ने अपने प्रशिक्षण के अनुभवों को साझा करते हुए लोकमान्य तिलक शिक्षक महाविद्यालय, डबोक को वर्तमान सेवाकाल के दौरान संस्कारों से संवर्द्धन में योगदान को अधिरेखांकित करते हुए मूल्यों की तपोभूमि बताया। एलुमनाई छात्र अपनी परंपरागत वेषभूषा में भी पहुंचे और राजस्थान की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को महाविद्यालय परिसर में जीवंत किया। महाविद्यालय के वर्तमान प्रशिक्षणार्थियों ने आगंतुकों के स्वागत में रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया। पुरातन छात्रों को अपने प्रशिक्षकों से पुनः मिलाने व स्मृतियों को तरोताजा करने के उद्देश्य से महाविद्यालय से सेवानिवृत शिक्षक प्रशिक्षकों प्रो. प्रवीण चंद्र दोशी, डॉ. देवेन्द्रा आमेटा, डॉ किरण घेरा,प्रो. शशि चित्तौडा, डॉ. वृन्दा शर्मा ,डॉ मनीष सक्सेना, को भी इस आयोजन में विशेष रूप से आमंत्रित कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में सम्मिलित प्रत्येक एलुमनाई को उपरणा एवं स्मृति चिन्ह भेंट सम्मानित किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. हरीश चैबीसा ने तथा धन्यवाद की रस्म प्राचार्य प्रो. सरोज गर्ग ने अदा कि। अंत में अगले सत्र में पुनः मिलने के वादे के साथ पुरातन छात्र सम्मेलन समाप्त हुआ।
इस मौके पर डॉ बलिदान जैन, डॉ. अमी राठौड़, डॉ. सुनीता मुर्डिया , डाॅ. रचना राठौड़, डाॅ. अमित बाहेती, डॉ. हरीश मेनारिया, डॉ. पुनीत पण्ड्या, डॉ. अमित दवे, डॉ. पल्लव पांडे, डॉ. हिम्मत सिंह चुंडावत, डॉ. सुभाष पुरोहित, डॉ. सरिता मेनारिया, डॉ अनिता कोठारी, डाॅ. जयसिंह जोधा, डाॅ. गुणबाला आमेटा, डा. इंदू आचार्य सहित पूर्व छात्र एवं संकाय सदस्यों ने अपनी भागीदारी निभाई ।
