धरती को जैविक इकाई मानकर गतिविधियां ठीक करें – प्रो. सारंगदेवोत
पर्यावरण को बचाने के लिए हर तबके को आगे आना होगा क्योंकि एक पेड़ से हर दिन मिलती है 230 लीटर ऑक्सीजन जिससे बचती है कई जिंदगियां – प्रो. सारंगदेवोत
उदयपुर 22 अप्रैल / विश्व पृथ्वी दिवस पर जनार्दन राय नागर राजस्थान विद्यापीठ डीम्ड टू बी विश्वविद्यालय के संघटक लोकमान्य तिलक शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय की ओर से सोमवार को महाविद्यालय के सभागार में आयोजित विश्व पृथ्वी दिवस : पृथ्वी के पुनर्स्थापन व सरंक्षण पर एक दिवसीय संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. शिव सिंह सारंगदेवोत ने कहा कि ब्रह्मांड में पृथ्वी एक ऐसा ग्रह है जिसमें जीवन है, जीवन को बचाना है तो पहले पृथ्वी को बचाना होगा। भारत में वसुधा को पूजने की परंपरा रही है। उपनिषदों में पृथ्वी को वसुधा कहा गया है। विभिन्न प्राकृतिक तत्वों से बनी वसुधा यानी पृथ्वी आज मानवीय भूलों की वजह से बड़े संकट से जूझ रही है। पृथ्वी का नाम आते ही इसकी व्यापकता पर भी गौर करने की जरूरत है, जिसमें जल, हरियाली, वन्य प्राणी प्रदूषण और इससे जुड़े अन्य तत्व शामिल हैं। धरती को बचाने के लिए इन सभी चीजों का संरक्षण करना बेहद जरूरी है। कहीं ना कहीं हमने ही आधुनिकता व शहरीकरण की रेस में पृथ्वी के संरक्षण की अनदेखी की है। कोरोना महामारी के दौरान हुए लॉकडाउन के बाद पर्यावरण में काफी बदलाव आया था। प्रदूषण का स्तर भी कम हो गया था, मगर इसके कुछ ही महीनों बाद हम लोग पर्यावरण संरक्षण को भूलते हुए पर्यावरण की चिंता किए बगैर अपने-अपने कामों में वापस जुट गए। मौजूदा स्थिति हमें सचेत करती है कि प्रदूषण को कम करने के लिए हमें अपने डेली रूटीन में बदलाव लाने की जरूरत है। एक पेड़ हर दिन लगभग 230 लीटर ऑक्सीजन देता है जो कई लोगों की जिंदगी बचाती है। वृक्ष कार्बनडाई ऑक्साइड़ को ऑक्सीजन में बदलते हैं। एक वृक्ष प्रतिवर्ष 12 टन कार्बनडाई ऑक्साइड को अवशोषित कर 0.4 टन ऑक्सीजन देता है। इसके अलावा वृक्ष अल्ट्रावायलेट किरणों से हमें बचाते है। कोरोना कॉल में ऑक्सीजन की बढ़ती मांग ने हमें पेड़ पौधों की अहमियत को समझाया है। कोरोना जैसे अन्य वायरसों से सुरक्षित रहने के लिए हमें पौधारोपण करना होगा तथा पृथ्वी को बचाने के लिए संकल्प लेना होगा। इसके लिए हमारा कर्तव्य है की जरूरी स्थानों पर ज्यादा से ज्यादा नए पेड़ पौधे लगाएं, पक्षियों के लिए घोंसले बनाएं, पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करें, साथ ही भूमि और जल प्रदूषण को रोकने के लिए प्लास्टिक का इस्तेमाल कम से कम करें। प्रकृति को नजरअंदाज करने से 30 प्रतिशत तक टाप स्वायल नष्ट हो चुके है, समुद्र भी 30 प्रतिशत तक प्रदूषित हो गया है। ऐसे समय में धरती को जैविक इकाई मान कर अपनी गतिविधियों को ठीक करना होगा। पृथ्वी संरक्षण को लेकर आज प्रत्येक व्यक्ति को सक्रीय रूप से कार्य करना होगा तभी संरक्षण की अलख जगाई जा सकती है।
मुख्य अतिथि कुलप्रमुख भंवर लाल गुर्जर ने कहा कि जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल 2024 में अमेरिकी दूतावास नई दिल्ली द्वारा प्रायोजित सत्र के पैनल में यह प्रश्न उठा था कि क्या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग पृथ्वी पर जलवायु सरंक्षण के लिए नहीं किया जा सकता है? तब बताया गया कि एआई जलवायु परिवर्तन के क्षेत्र में अनुमान भी लगा सकता है और ऑप्टिमाइज़ भी कर सकता है। नवीन तकनीक के दुरुपयोग नहीं उपयोग की जरूरत है।
प्रारंभ में प्राचार्य प्रो. सरोज गर्ग ने अतिथियों का स्वागत करते हुए एक दिवसीय संगोष्ठी की जानकारी दी। संचालन डॉ. हरीश चौबीसा ने किया आभार डॉ. रचना राठौड़ ने जताया। इस अवसर पर विद्यापीठ के डीन-डायरेक्टर्स व कार्यकर्ता उपस्थित थे ।
प्रदूषण को कम करने के लिए हमें अपनी डेली रूटीन में बदलाव लाने की जरूरत – प्रो. सारंगदेवोत
विश्व पृथ्वी दिवस : पृथ्वी के पुनर्स्थापन व सरंक्षण पर एक दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन
