उदयपुर। श्री वर्द्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ द्वारा सोमवार को पंचायती नोहरे में सुकुन मुनि महाराज, अमृत मुनि महाराज, महेश मुनि महाराज, डॉ. वरुण मुनि महाराज एवं अखिलेश मुनि महाराज के सानिध्य में लोकाशाह जयंती एवं चातुर्मास विदाई समारोह का भव्य आयोजन किया गया।
महामंत्री एडवोकेट रोशन लाल जैन ने बताया कि इस अवसर पर चातुर्मास काल के दौरान श्रीसंघ,श्रावक संघ श्राविका संघ के सभी पदाधिकारी एवं सदस्यों का चातुर्मास काल के दौरान किए गए तन मन धन के सहयोग के लिए स्वागत अभिनंदन किया गया। इसके साथ ही चातुर्मास कल के पूरे पांच महीने के दौरान घर-घर नवकार महामंत्र जाप का दौर चला। जिसके सभी लाभार्थियों का स्वागत अभिनंदन किया गया।
जैन ने बताया कि इस दौरान करीब डेढ़ सौ सदस्यों का सम्मान किया गया। इसमें वे सभी श्रावक श्राविकाएं भी शामिल थे जिन्होंने प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से चातुर्मास के सफल आयोजन के लिए श्री संघ का सहयोग किया। इन सभी के सहयोग के कारण ही उदयपुर का यह चातुर्मास ऐतिहासिक बन पाया। जैन ने कहा कि यह हमारा सौभाग्य रहा कि सुकुन मुनि महाराज का चौमासा हमें मिला। पूरे पांच माह तक पूरा उदयपुर ही नहीं मेवाड़ वागड़ सहित संभाग के सभी समाजजनों ने इसका धर्म लाभ लिया। उन्होंने कहा कि ऐसा मेवाड़ ही नहीं बल्कि पूरे संभाग में प्रथम बार है की चातुर्मास काल के पूरे 5 महीने तक लगातार घर-घर में नवकार महामंत्र का जाप चला।
उदयपुर के इस चातुर्मास ने सफलता के नए आयाम छुए हैं। सुकुन मुनि महाराज के सानिध्य में जो ज्ञान गंगा उदयपुर शहर में वही है वह बरसों बरसों तक यहां के लोगों में धर्म प्रभावना बिखेरती रहेगी एवं सभी को प्रेरणा देगी की नवकार महामंत्र का जाप निरंतर करने से किस तरह के लाभ होते हैं।
उन्होंने कहा कि आज लोकाशाह जयंती भी है और चातुर्मास समापन का विदाई समारोह भी है। दोनों बहुत ही महत्वपूर्ण आयोजन है। विदाई की वेला में सभी श्रावक श्राविकाएं भावुक है लेकिन क्या करें यह प्रकृति का नियम है। हर चीज का एक समय निर्धारित होता है उसमें से चातुर्मास काल भी एक है। समारोह में बारी-बारी से धर्म सभा में गुरुदेव के सामने श्रावक श्राविकाओं ने चातुर्मास काल के दौरान उनकी ओर से जाने अनजाने में हुई किसी भी भूल चूक के लिए खमतखामणा और क्षमा याचना प्रेषित की।
अध्यक्ष एडवोकेट सुरेश नागौरी ने बताया कि सुकुन मुनि महाराज ससंघ का प्रातः 9 बजे पंचायती नोहरे से अशोकनगर स्थित लोकाशाह स्थानक के लिए विहार होगा।
धर्म सभा में सुकुन मुनि महाराज, अमृत मुनि महाराज, महेश मुनि महाराज, डॉ. वरुण मुनि महाराज एवं अखिलेश मुनि महाराज ने कार्तिक पूर्णिमा के महान दिन लोकाशाह जयंती के अवसर पर कहां कि लोकाशाह ने जीवन पर्यंत धर्म प्रभावना का कार्य किया। लोकाशाह का जन्म ऐसे काल में हुआ जब धर्म पर चारों ओर से संकट बरस रहा था। लोग धर्म से दूर होते जा रहे थे धर्म को खत्म करने की साजिशें रची जा रही थी। यह देखकर लोकाशाह के मन में अपने आप ही वैराग्य उत्पन्न हुआ और वह धर्म प्रभावना के मार्ग पर निकल पड़े। उन्होंने जीवन पर्यंत धर्म की अलख जगाई और लोगों को धर्म के प्रति जागृत किया। अपने जीवन के अंतिम पड़ाव में भी उन्होंने अपने शरीर की चिंता नहीं करते हुए वह लगातार धर्म की प्रभावना में लग रहे।
चातुर्मास समापन पर विदाई की वेला में मुनि श्री ने कहा कि पानी बहता हुआ और साधु चलता हुआ ही अच्छा लगता है। चातुर्मास काल के बाद साधु एक जगह नहीं रहते हैं। हर आने वाले के जाने का समय भी निश्चित होता है। आज चातुर्मास का समय भी निकल गया। एक समय था जब चातुर्मास प्रारंभ हुआ था और आज 5 महीने बाद वह समय है जब चातुर्मास काल का समापन हो चुका है। उदयपुर में सभी के सहयोग से यह चातुर्मास भव्यऔर ऐतिहासिक रहा इसके लिए सभी को शुभ आशीर्वाद। उन्होंने श्रावकों से कहा कि अपने चातुर्मास काल के दौरान जो भी धर्म प्रभावना या धर्म ज्ञान प्राप्त किया है उसे चातुर्मास काल तक ही सीमित न रखें बल्कि अपने आत्म कल्याण के लिए उसे अपने जीवन में बनाए रखें।
लोकाशाह जयंती एवं चातुर्मास विदाई समारोह का आयोजित
