भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़, मावली तथा वल्लभनगर में भाजपा—कांग्रेस के लिए चुनौती बने हुए हैं निर्दलीय या अन्य तीसरी पार्टी
-सुभाष शर्मा
उदयपुर। मेवाड़ की हॉट सीटों में शुमार भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़, मावली और वल्लभनगर इन सभी पर इस बार त्रिकोणीय मुकाबला है। यहां भाजपा और कांग्रेस के प्रत्याशियों पर निर्दलीय तथा अन्य तीसरे दल के प्रत्याशी भारी पड़ रहे हैं। ये सभी विधानसभा सामान्य वर्ग की हैं।
भीलवाड़ा में गौ भक्त की दावेदारी बनी चुनौती
विधानसभा चुना में भीलवाड़ा परम्परागत रूप से भाजपा की सीट रही है। 1998 में कांग्रेस के देवेन्द्र सिंह अंतिम बार कांग्रेस से विजेता रहे। उसके बाद यह सीट भाजपा की गढ़ बन गई और भाजपा से विट्ठलशंकर अवस्थी लगातार दो बार विजेता रहे। पार्टी ने एक बार फिर तीसरी बार उन्हें चुनाव मैदान में उतारा लेकिन गौ भक्त अशोक कोठारी के ताल ठोकने से यहां मुकाबला त्रिकोणीय हो गया। अशोक कोठारी यूं तो संघ और भाजपा की विचारधारा से जुड़े रहे लेकिन उन्होंने कभी भाजपा या संघ की सदस्यता ग्रहण नहीं की। भाजपा के दो पूर्व जिलाध्यक्ष तथा नगर परिषद के उपाध्यक्ष सहित अन्य कई भाजपाई उनके समर्थक में मैदान में जुटे हुए हैं। भाजपा उन सभी पदाधिकारियों तथा कार्यकर्ताओं की सदस्यता रद्द कर चुकी है। भाजपा के विट्ठल शंकर अवस्थी ने पिछला चुनाव 49 हजार से अधिक मतों से जीता किन्तु अशोक कोठारी के मैदान में डटे रहने से भीलवाड़ा का मुकाबला बेहद रोचक हो चुका है।
चित्तौड़गढ़ विधानसभा में भाजपा विधायक आक्या ने निर्दलीय मैदान में उतर मुकाबला बनाया रोचक
मेवाड़ की कभी राजधानी रही चित्तौड़गढ़ विधानसभा से भाजपा ने पार्टी विधायक चंद्रभान सिंह आक्या की जगह पूर्व उप राष्ट्रपति भैरोंसिंह शेखावत के दामाद नरपतसिंह राजवी को टिकट दिया। जिससे आक्या नाराज हो गए और बगावत करते हुए वह निर्दलीय मैदान में डटे रहे। भाजपा नेता अमित शाह की आक्या को बिठाने की कोशिश असफल रही, जिसके बाद भाजपा ने अपनी पार्टी के विधायक आक्या को पार्टी से बाहर कर दिया। आक्या के ताल ठोकने से चित्तौड़गढ़ भी त्रिकोणीय मुकाबला बना हुआ है। यहां भाजपा के नरपतसिंह राजवी के अलावा आक्या का मुकाबला कांग्रेस के सुरेद्र सिंह जाड़ावत से हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में आक्या ने जाड़ावत को लगभग 18 हजार मतों से हराया था।
वल्लभनगर में भाजपा पर भारी जनता सेना
उदयपुर जिले में शक्तावत घराने की परम्परागत सीट रही वल्लभनगर विधानसभा में भी त्रिकोणीय मुकाबले की स्थिति है। यहां पिछले दो चुनाव में भाजपा की स्थिति बेहद ही दयनीय रही। साल 2018 में भाजपा यहां चौथे नंबर पर रही और मुख्य मुकाबला कांग्रेस और आरएलपी के बीच रहा। जबकि तीसरे नंबर पर जनता सेना रही। यहां भाजपा कुल मतों का 12 फीसदी भी नहीं पा सकी। इस बार भाजपा ने पिछली बार आरएलपी उम्मीदवार रहे उदयलाल डांगी को टिकट देकर कांग्रेस और जनता सेना के समक्ष चुनौती खड़ी की है। कांग्रेस से यहां लगातार दूसरी बार प्रीति गजेंद्र शक्तावत तथा जनता सेना से मुखिया रणधीर सिंह भींडर की पत्नी दीपेंद्र कुंवर मैदान में है।
मावली विधानसभा में भाजपा बागी ने बनाया त्रिकोणीय मुकाबला
मावली विधानसभा सीट उदयपुर जिले की दूसरी ऐसी सीट है, जहां त्रिकोणीय मुकाबला है। यहां भाजपा के बागी कुलदीप सिंह सेंगर मैदान में बने हुए हैं। यहां से भाजपा विधायक धर्मनारायण जोशी के चुनाव लड़ने से इंकार करने के बाद कुलदीप सिंह यह मान रहे थे कि पार्टी उन्हें टिकट देगी। अंतिम समय में असम के राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया के समर्थक कहे जाने वाले कृष्ण गोपाल पालीवाल को टिकट मिला। जबकि कांग्रेस ने पिछली बार उम्मीदवार रहे पुष्करलाल डांगी पर भरोसा जताया। कुलदीप सेंगर के पिछले कुछ सालों से सक्रियता के चलते यहां भी मुकाबला बेहद रोचक तथा त्रिकोणीय हो गया है। हालांकि मतगणना के बाद ही पता लग पाएगा कि जीत किसके हाथ लगेगी लेकिन इन सभी जगह एक बात कॉमन है कि चारों ही विधानसभा क्षेत्र में भाजपा के बागी या भाजपा विचारधारा से जुड़े लोग ही चुनौती बने हुए हैं।
मेवाड़ की ये हैं हॉट सीटें, जहां त्रिकोणीय है मुकाबला
