आयड़ तीर्थ में माता पद्मावती का जप अनुष्ठान एवं एकासना व्रत का आयोजन  

साध्वियों के सानिध्य में अष्ट प्रकार की पूजा-अर्चना की  
उदयपुर 3 नवम्बर। श्री जैन श्वेताम्बर महासभा के तत्वावधान में तपागच्छ की उद्गम स्थली आयड़ तीर्थ पर बरखेड़ा तीर्थ द्वारिका शासन दीपिका महत्ता गुरू माता सुमंगलाश्री की शिष्या साध्वी प्रफुल्लप्रभाश्री एवं वैराग्य पूर्णाश्री आदि साध्वियों के सानिध्य में शुक्रवार को पद्मावती माता के जाप एवं एकासना व्रत के साथ विशेष पूजा-अर्चना अनुष्ठान हुए। महासभा के महामंत्री कुलदीप नाहर ने बताया कि आयड़ तीर्थ के आत्म वल्लभ सभागार में सुबह 7 बजे दोनों साध्वियों के सानिध्य में आरती, मंगल दीपक, सुबह सर्व औषधी से महाअभिषेक एवं अष्ट प्रकार की पूजा-अर्चना की गई। राज राजेश्वरी एकभवावतारी पद्मावती माता के एकासने एवं जाप करवाने का लाभ स्नेहलता दलाल परिवार ने लिया है। जैन श्वेताम्बर महासभा के अध्यक्ष तेजसिंह बोल्या ने बताया कि विशेष महोत्सव के उपलक्ष्य में प्रवचनों की श्रृंखला में प्रात: 9.15 बजे साध्वी प्रफुल्लप्रभाश्री व वैराग्यपूर्णा   के सान्निध्य में आयड़ तीर्थ में प्रति शुक्रवार के तहत आज माता पद्मावती देवी का भव्याति भव्य रूप से पूजा- अर्चना- जाप – अनुष्ठान का श्रद्धा एवं भक्ति भावना से आराधना की गई। श्रद्धालु-श्रावक एवं श्राविकाएं अनुष्ठान करके अपनी मनोकामनाओं को पूर्ण करने की कामना की। साध्वियों ने बताया कि इस वर्तमान काल के अंदर पाश्र्वनाथ परमात्मा की अधिषयिका मां पद्मावती साक्षात् दिव्य स्वरूपा है। इच्छिल फल को देने वाली माना है। उपसर्गों ना कष्टों का निवारण करती है। सहयोग प्रदान करती है। श्रद्धा-पूर्वक हमें परमात्मा की एवं अधिष्यिायिका मां की आराधना – उपासना करनी चाहिए।  जिस प्रकार मलेरिया, टाइफाइड, कैंसर या टी. बी. किस कारण से बुखार आ रहा है, यह निदान किए बिना मात्र बुखार की दवा लेने से सही होने की बजाए और बढ़ता ही जाएगा। इसी प्रकार के दुख के उद्गम स्थान दु:ख के कारण पर विचार किए कभी बिना उसे दूर करने का प्रयत्न करने से दु:ख भी दूर नहीं होगा। आज माता पद्मावती देवी का जाप अनुष्ठान किया गया।  चातुर्मास संयोजक अशोक जैन ने बताया कि आयड़ जैन तीर्थ पर प्रतिदिन सुबह 9.15 बजे से चातुर्मासिक प्रवचनों की श्रृंखला में धर्म ज्ञान गंगा अनवरत बह रही है।

By Udaipurviews

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