सुकन मुनि जी के सानिध्य में मनाया श्राविका संघ का 32वां स्थापना दिवस

समता और साधना का प्रतीक है श्राविका संघ-सुकनमुनि जी
उदयपुर। श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रमण संघ की ओर से सिंधी बाजार स्थित पंचायती नोहरे में श्रमण संघीय प्रवर्तक सुकनमुनि महाराज के सानिध्य मे श्राविका संघ का 32 व स्थापना दिवस समारोह मनाया गया। समारोह का प्रारंभ मंगलाचरण से हुआ। इसके बाद झंडा रोहण किया गया। श्राविका संघ अध्यक्ष मंजू सिरोया ने स्वागत उद्बोधन देते हुए कहा कि कल्पनाओं से कुछ नहीं होता है हम वर्तमान का अनुमोदन करते हैं। श्राविका संघ हमेशा से ही गुरु भक्ति के लिए तत्पर रहता है। समाज सेवा एवं धर्म कार्यों में यह संघ हमेशा मुख्य भूमिका निभाता रहा है। वर्ष भर सामाजिक एकता एवं धर्म कार्यों को आगे बढ़ाने के लिए श्राविका का संघ की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है।
श्रीसंघ जो भी जिम्मेदारी सौंपता है उसे पूर्ण जिम्मेदारी के साथ निभाते हैं। इस चातुर्मास काल में भी श्राविका संघ ने धर्म आराधना में कोई कमी नहीं छोड़ी और त्याग तपस्या में एक कीर्तिमान स्थापित किया। श्राविका संघ समाज उत्थान के लिए हमेशा कार्य करता आया है और कार्य करता रहेगा।श्राविका संघ की सभी सदस्यों के साथ मुख्य अतिथि के तौर पर पूर्व मेयर श्रीमती रजनी डांगी भी विशेष तौर से उपस्थित रही। संघ की महामंत्री ने संघ के प्रतिवेदन का वाचन किया। समझ में अतिथियों का स्वागत अभिनंदन किया गया।
इस अवसर पर प्रातः कालीन धर्म सभा में सुकन मुनिजी ने श्राविका संघ को बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि श्राविका संघ समता और साधना का प्रतीक है। गुरु भक्ति और धर्म आराधना में यह संघ किसी से भी पीछे नहीं है। संघ का कोई भी काम हो उसे जिम्मेदारी के साथ निर्वहन करना यह अपना दायित्व समझते हैं। श्राविका संघ के स्थापना काल के 32 वर्ष पूर्ण होना ही अपने आप में गर्व की बात है।
डॉ. वरुण मुनि ने श्राविका संघ की स्थापना दिवस पर नारी का गुणगान करते हुए कहां कि आज अगर समाज में धर्म है तो श्राविका संघ और नारी शक्ति के कारण ही है। नारी का सबसे बड़ा गुण होता है सहनशीलता। नारी को क्रोध के वशीभूत दो बातें भी बोल दी जाए तो वह उसे अपने दिल पर नहीं लेती है और तुरंत उसे क्षमा दे देती है। सबसे ज्यादा सेवा धर्मी है तो वह नारी शक्ति ही है। परिवार को बढ़ाने और उसके उत्थान का श्रेय नारी को ही जाता है। तो कभी-कभी परिवार में बिखराव जैसे दोष भी नारी पर लगते रहते हैं। लेकिन नारी शक्ति चुपचाप इन सब को सुनकर सहन कर लेती है और अंत में अपने परिवार को बिखराव से रोक देती है। नारी शक्ति की सबसे बड़ी विशेषता यही है कि वह अपना काम कभी दूसरों पर नहीं छोड़ती है। अपने काम की जिम्मेदारी वह स्वयं उठाती है और सबसे बड़ी बात समय अनुसार ही वह काम कर देती है।
महामंत्री एडवोकेट रोशन लाल जैन ने बताया कि श्राविका संघ के 32 वें स्थापना दिवस को लेकर के पूरे श्री संघ में हर्ष की लहर है। अगर श्राविका संघ नहीं है तो श्रावक संघ का भी कोई औचित्य नहीं रह जाता है। आज अगर श्रीसंघ ऐसे महत्वपूर्ण कार्य करता है उसका सारा श्रेय श्राविका संघ को जाता है। इस अवसर पर उन्होंने पूरे श्री संघ की ओर से श्राविका संघ को बधाइयां प्रेषित की। उन्होंने कहा कि आज भी धर्म सभा में देश के विभिन्न क्षेत्रों से गुरु भक्त सम्मिलित हुए। सभी का श्रीसंघ की ओर से स्वागत अभिनंदन किया गया।

By Udaipurviews

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