श्रीमद् भागवत कथाः भक्ति का भाव जागृत कर दे वही भागवत

फतहनगर। विश्वशांति,जनकल्याणार्थ एवं सकल मनोकामनार्थ श्री लक्ष्मीनारायण अखाड़ा मंदिर परिसर में चल रहे श्रीमद्भागवत सप्ताह ज्ञानयज्ञ के दूसरे दिन संगीतमयी प्रस्तुति के दौरान कथा वाचक पं.माणकचंद मेनारिया ने भागवत महिमा के साथ कहा कि जो भक्ति का भाव जागृत कर दे वही भागवत है। सभी को अहंकार का त्याग करना चाहिए। मन कर्म और वचन से होने वाले पापों का समन करना चाहिए। भगवान के 24 अवतारों का संक्षिप्त वर्णन किया। भागवत में श्लोक और रामायण में चैपाई प्रमुख है। वेद व्यासजी और सुखदेव जी के मिलन की कथा के साथ कहा कि गंगा की तरह भागवत का लोक कल्याण हेतु प्राकट्य हुआ है। जन्म जन्म के सौभाग्य से ही सतसंग और हरिकथा मिलने से सुख प्राप्त होता है। हरि दर्शन के लिए मंदिर शुभवस्त्रों में ही जाना चाहिए। सुख से नहीं दुःख मिलने पर ही भगवान के दर्शन हो सकते हैं। जिनके जन्म जन्म के भाग्य उदय होते हैं वही भागवत कथा का श्रवण कर सकते हैं। चतुरश्लोकि भागवत कथा की महिमा का गान किया। कथा में श्रीकृष्ण भीष्म पितामह के करुण संवाद प्रसंग, पांडवों के स्वर्गारोहण, राजा परीक्षित को श्रृंगी ऋषि श्राप की कथा के बाद आरती एवं प्रसाद वितरण किया गया।
By Udaipurviews

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