उदयपुर। वासुपूज्य मंदिर दादाबाड़ी में गुरुवार को आयोजित नियमित प्रवचन में साध्वी विद्युतप्रभा श्रीजी आदि ठाणा-6 ने श्रावक-श्राविकाओं को संबोधित करते हुए कहा कि भगवान महावीर की देशना का मुख्य उद्देश्य प्रत्येक जीव को उसके वास्तविक स्वरूप का बोध कराना था। मनुष्य को यह समझना चाहिए कि सच्चा सुख बाहरी वस्तुओं में नहीं, बल्कि उसकी अपनी आत्मा में निहित है।
साध्वीश्री ने सहज सुख और आरोपित सुख के अंतर को स्पष्ट करते हुए कहा कि पदार्थों और इंद्रियों से मिलने वाला सुख बाहरी परिस्थितियों पर निर्भर होता है, जबकि आत्मा और उसके गुणों से प्राप्त होने वाला आनंद सहज एवं वास्तविक सुख है।
साध्वीश्री ने कहा कि आनंद हमारे भीतर और हमारी आत्मा में विद्यमान है। शरीर और इंद्रियां मौजूद होने के बावजूद आत्मा के बिना आनंद का अनुभव संभव नहीं है। यही अध्यात्म का मूल भाव है। मनुष्य को अपनी दृष्टि बाहरी पदार्थों से हटाकर आत्मिक गुणों की ओर केंद्रित करनी चाहिए।
प्रवचन के दौरान साध्वी प्रज्ञानजना श्रीजी, साध्वी नमन रुचि श्रीजी, साध्वी योगरुचि श्रीजी और साध्वी तन्मय रुचि श्रीजी ने भक्ति गीत प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में उपस्थित श्रावक-श्राविकाओं ने प्रवचन का लाभ लिया।
आत्मिक सुख की अनुभूति ही जीवन का वास्तविक आनंदःसाध्वी विद्युतप्रभा श्रीजी
