जयपुर, 07 अक्टूबर। महानिदेशक पुलिस राजस्थान श्री राजीव कुमार शर्मा के निर्देशानुसार राजस्थान पुलिस की साइबर क्राइम ब्रांच (R4C) द्वारा राज्य में साइबर अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण लगाने और आमजन को जागरूक करने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण जनहित एडवाइजरी जारी की गई है। अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस साइबर क्राइम श्री वी.के. सिंह ने बताया कि चाइल्ड सेक्सुअल एब्यूज मटेरियल (CSAM) यानी बच्चों के यौन शोषण व दुर्व्यवहार से संबंधित किसी भी सामग्री को ऑनलाइन खोजना, देखना, बनाना, डाउनलोड करना या शेयर करना कानूनन गंभीर और दंडनीय अपराध है।
एडीजी श्री सिंह ने बताया कि यह कोई सामान्य एडल्ट कंटेंट नहीं है, बल्कि 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों के खिलाफ होने वाले यौन अपराधों का डिजिटल दस्तावेज है, जिसमें बच्चे की सहमति कानूनन मान्य नहीं होती। ऐसी सामग्री का इंटरनेट पर प्रसार बच्चे के मौलिक अधिकारों, निजता और गरिमा का सीधा उल्लंघन है।
डिलीट करने के बाद भी दर्ज रहता है डिजिटल रिकॉर्ड; न बनें अपराध के चक्र का हिस्सा:
श्री सिंह ने बताया कि जब कोई व्यक्ति इंटरनेट पर CSAM सामग्री को देखता, सर्च करता या डाउनलोड करता है, तो इससे ऐसी अवैध सामग्री की मांग बढ़ती है और अपराधियों को बच्चों के शोषण का और अधिक अवसर मिलता है। इसलिए ऐसी सामग्री को देखना या शेयर करना सीधे तौर पर “चैन ऑफ क्राइम” (अपराध के चक्र) का हिस्सा बनना है।
पुलिस ने सचेत किया है कि इंटरनेट पर CSAM सामग्री सर्च करने या किसी सोशल मीडिया ग्रुप में प्राप्त करने पर उसका पक्का डिजिटल रिकॉर्ड दर्ज हो जाता है, जो फाइल डिलीट करने के बाद भी फॉरेंसिक रिकॉर्ड में सुरक्षित रहता है। अनजाने में या अनचाहे ऐसी सामग्री प्राप्त होने पर उसे आगे बढ़ाने के बजाए तुरंत साइबर पोर्टल पर रिपोर्ट करने की अपील की गई है।
नागरिकों के लिए ‘क्या करें’ और ‘क्या न करें’ के स्पष्ट निर्देश:
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क्या करें:
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इंटरनेट या सोशल मीडिया पर CSAM सामग्री दिखने पर तुरंत राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (www.cybercrime.gov.in) पर रिपोर्ट दर्ज कराएं। नागरिक बिना अपनी पहचान उजागर किए Anonymous (गुमनाम) रिपोर्टिंग विकल्प का उपयोग कर सकते हैं।
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जांच में सहायता के लिए संबंधित यूआरएल (URL), यूजरनेम और समय का विवरण नोट रखें।
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अपने बच्चों को ‘सेफ टच’ व ‘अनसेफ टच’ का बोध कराएं और इंटरनेट पर अज्ञानता में अजनबियों से फोटो साझा न करने की सीख दें।
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किसी भी सहायता के लिए राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 या बाल हेल्पलाइन 1098 पर संपर्क करें।
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क्या न करें:
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ऐसी किसी भी तस्वीर, वीडियो या लिंक को किसी भी व्यक्ति या ग्रुप में भूलकर भी फॉरवर्ड न करें।
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सबूत जुटाने के उद्देश्य से भी ऐसी सामग्री का स्क्रीनशॉट न लें और न ही उसे फोन, कंप्यूटर या क्लाउड में सेव करें।
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कानून हाथ में लेने या संबंधित व्यक्ति से बहस करने के बजाए मामला तुरंत पुलिस को सौंपें।
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किसी भी घटना पर यह सोचकर चुप न बैठें कि यह व्यक्तिगत मामला नहीं है, क्योंकि एक सही रिपोर्ट किसी मासूम का जीवन बचा सकती है।
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तत्काल सहायता एवं शिकायत दर्ज कराने के लिए उपलब्ध माध्यम:
यदि किसी नागरिक के सामने इस प्रकार का मामला आता है, तो उसकी सूचना तुरंत निकटतम पुलिस थाना, साइबर पुलिस स्टेशन या राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर दी जा सकती है। इसके अलावा आपातकालीन मदद के लिए साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 तथा विशेष साइबर हेल्पडेस्क नंबर 9256001930 व 9257510100 पर संपर्क किया जा सकता है।
