उदयपुर, 4 अक्टूबर। तपागच्छ की उद्गम स्थली उदयपुर के आयड़ जैन तीर्थ में रविवार को आयोजित विशाल तपागच्छीय सम्मेलन में मालव मार्तंड पूज्य आचार्य डॉ. मुक्तिसागर सूरीश्वर महाराज ने तपागच्छीय परंपरा, संगठन और अपनी मूल परंपरा से जुड़े रहने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि भगवान महावीर के अनुयायी अलग-अलग पंथ, मत, गच्छ और समुदायों में विभाजित हैं, लेकिन सभी का सम्मान करते हुए प्रत्येक व्यक्ति को अपनी परंपरा और गच्छ से दृढ़ता से जुड़े रहना चाहिए। खंडन किसी का नहीं करना है, आलोचना और टीका-टिप्पणी से बचना है, लेकिन अपनी जड़ों और परंपरा को नहीं छोडऩा है। आचार्यश्री ने परिवार का उदाहरण देते हुए कहा कि यदि एक पिता के चार बेटे हों, उनके दस-बारह पौत्र और उनके भी पच्चीस-तीस प्रपौत्र हों तथा चार पीढिय़ां एक साथ एक ही घर में रहती हों, तो प्रत्येक व्यक्ति अपने पिता को ही पिता मानेगा। परिवार के अन्य बड़े सदस्यों को वह ताऊ, चाचा, दादा या अन्य रिश्तों के रूप में सम्मान देगा, लेकिन पिता का स्थान किसी अन्य को नहीं दे सकता। इसी प्रकार भगवान महावीर के वारिस होने के नाते हम भले ही अनेक पंथ, मत, गच्छ और समुदायों में विभाजित हों, लेकिन जिस पंथ और गच्छ से जुड़े हैं, उसके प्रति निष्ठा बनाए रखना आवश्यक है। अपने गच्छ को पिता के समान मानते हुए उसकी परंपरा से जुड़े रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमें किसी का खंडन नहीं करना, बल्कि अपनी तपागच्छीय परंपरा का मंडन करते हुए उसे आगे बढ़ाना है। तपागच्छ भगवान महावीर की पाट परंपरा से चली आ रही गौरवशाली परंपरा है और इसकी जड़ों से जुड़े रहना प्रत्येक श्रावक का दायित्व है।
– आठ सौ वर्ष पूर्व हुआ था तपागच्छ का नामकरण
श्री जैन श्वेतांबर महासभा महामंत्री कुलदीप नाहर ने बताया कि आचार्यश्री ने सम्मेलन में तपागच्छ के करीब आठ सौ वर्ष पूर्व हुए नामकरण और इसकी ऐतिहासिक परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि यह केवल एक गच्छ का नाम नहीं, बल्कि साधना, संस्कार, अनुशासन और गुरु परंपरा से जुड़ी एक समृद्ध आध्यात्मिक धारा है। इस परंपरा को मजबूत बनाने के लिए आपसी सम्मान, संगठन और एकजुटता आवश्यक है। सम्मेलन में महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान और मध्यप्रदेश सहित चार राज्यों से आए शताधिक तपागच्छीय संघों के आगेवानों ने सहभागिता की और अपने विचार रखे। वक्ताओं ने तपागच्छीय परंपरा की विशेषताओं, संगठन को मजबूत करने तथा भावी पीढ़ी को धर्म एवं संस्कारों से जोडऩे पर विचार व्यक्त किए।
– राज्यपाल गेहलोत सहित अतिथियों का बहुमान
कार्यक्रम संयोजक सतीश कच्छारा ने बताया कि सम्मेलन में आयड़ तीर्थ के उपाध्यक्ष भोपालसिंह परमार एवं सचिव कुलदीप नाहर के साथ इंदौर से पधारे तपागच्छ संघ के डॉ. प्रकाशचंद गगानी, पुखराज सुराणा, कैलाश नाहर एवं यशवंत जैन ने बैंगलोर से मुख्य अतिथि के रूप में पधारे कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गेहलोत, उदयपुर के उप महापौर दिनेश भट्ट एवं अहमदाबाद के भूषणभाई शाह का बहुमान किया। राज्यपाल थावरचंद गेहलोत ने तपागच्छीय संगठन की वृद्धि एवं विस्तार के लिए शुभकामनाएं व्यक्त कीं। भूषणभाई शाह ने तपागच्छीय परंपरा एवं उसके ऐतिहासिक स्वरूप का विस्तृत परिचय दिया। सम्मेलन में चारों राज्यों से पहुंचे विभिन्न संघों के प्रतिनिधियों ने भी अपने विचार रखे। आयड़ तीर्थ पर आयोजित सम्मेलन में भोपाल सिंह नाहर, कुलदीप नाहर, चन्द्र सिंह, अशोक जैन, राजेंद्र जावरिया, प्रकाश नागोरी, हेमंत सिंघवी, राजेश जावरिया, दिनेश बापना, भोपाल सिंह परमार, अभय नलवाया, कैलाश मुर्डिया, चतर सिंह पामेच, सतीश कच्छारा, दिनेश भंडारी, चिमनलाल गांधी, प्रद्योत महात्मा, रमेश सिरोया, कुलदीप मेहता सहित बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं उपस्थित रहे।
तपागच्छीय सम्मेलन उदयपुर: आचार्य मुक्तिसागर सूरीश्वर महाराज बोले- ‘अपनी जड़ों से जुड़े रहें’
