उदयपुर, 25 सितंबर। श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ के तत्वावधान में देवेन्द्र धाम स्थित महावीर समवशरण में धर्मसभा आयोजित हुई। धर्मसभा को संबोधित करते हुए डॉ. सुरेन्द्र मुनि ने कहा कि मनुष्य को अपनी आत्मा को अपना मानना चाहिए, लेकिन वह नाशवान सांसारिक वस्तुओं को पाने में तन-मन लगा देता है। मृत्यु के समय शरीर के वस्त्र और आभूषण तक छूट जाते हैं तथा कफन भी चिता के साथ राख हो जाता है। इसके बावजूद मनुष्य मोहवश सांसारिक वस्तुओं को अपना और आत्मा को पराया मान बैठता है।
उन्होंने कहा कि आज मनुष्य की प्रार्थना भी निष्काम नहीं रही, बल्कि उसमें स्वार्थ और इच्छाएं शामिल हो गई हैं। सच्ची प्रार्थना केवल शब्दों से नहीं, बल्कि निर्मल अंतःकरण और हृदय से होनी चाहिए। मुनि जी ने भक्तगणों को कहा कि आज अनंत चतुर्दशी पर आप सभी संकल्प लें की हमें अनंत चतुर्दशियां हो गई चार गति 84 लाख जीव योनि में परिभ्रमण करते हुए, अब पाप कर्म छोड़कर धर्म-कर्म करके अनंत चतुर्दशी को सार्थक बनाएं!
प्रवर्तक डॉ. राजेन्द्र मुनि ने आचार्य मानतुंग की प्रार्थना का उल्लेख करते हुए कहा कि हृदय से निकली भक्ति सांसारिक बंधनों को कमजोर करती है। उपाध्याय रमेश मुनि एवं दीपेश मुनि ने कहा कि मन के विकार और अशुद्धियां दूर किए बिना प्रार्थना सफल नहीं हो सकती।
इस अवसर पर सोहन कुंवर महिला मंडल ने गुरुणी सोहन कुंवर के जीवन पर संगीतमय प्रस्तुति दी। इस अवसर पर राजकोट से आए हुए उद्योगपति सांखला एवं संभाजी नगर से आए हुई पूर्व जज उमाजी बोरा का समाज की ओर से अभिनंदन किया गया अंत में समाज की ओर से अनंत चतुर्दशी की शुभकामनाएं दी गईं।
हृदय से निकली प्रार्थना ही बनती है सार्थकःडॉ. सुरेन्द्र मुनि
