परिवर्तिनी एकादशी परिवर्तन का संदेश देती है: प्रशांत अग्रवाल

उदयपुर व्यूज़ | ताजा खबरें


उदयपुर, 21 सितंबर।
 नारायण सेवा संस्थान के अध्यक्ष प्रशांत अग्रवाल के सानिध्य में वर्ल्ड ऑफ ह्यूमैनिटी में चल रही ‘अपनों से अपनी बात’ में धार्मिक प्रसंगों के माध्यम से भक्ति, त्याग, सेवा और संवेदना का संदेश दिया गया। उन्होंने भक्त कूर्मदास, परिवर्तिनी एकादशी, राजा मुचुकुंद तथा लक्ष्मण-उर्मिला के प्रसंगों के माध्यम से कहा कि सच्ची भक्ति वही है, जो किसी के जीवन में सहारा और उम्मीद बन जाए।

भक्त कूर्मदास का प्रसंग सुनाते हुए उन्होंने बताया कि जन्म से हाथ-पैर न होने के बावजूद कूर्मदास भगवान विट्ठल के दर्शन के लिए पैठण से पंढरपुर निकल पड़े। लऊळ गांव पहुंचकर जब आगे बढ़ना संभव नहीं रहा तो उन्होंने संदेश भेजा कि अपनी ओर से पूरा प्रयास कर लिया, अब शेष रास्ता भगवान तय करें। कथा के अनुसार भगवान स्वयं उनके पास पहुंचे। उन्होंने कहा कि भक्ति में दूरी नहीं, समर्पण और प्रयास महत्वपूर्ण हैं।

परिवर्तिनी एकादशी के संदर्भ में उन्होंने भगवान विष्णु की योगनिद्रा और करवट बदलने का उल्लेख करते हुए कहा कि जीवन में परिवर्तन आवश्यक है। मनुष्य को नाराजगी, कटुता और अहंकार छोड़कर प्रेम व सेवा की ओर मुड़ना चाहिए। जो लोग बीमारी या शारीरिक अक्षमता के कारण स्वयं करवट तक नहीं बदल सकते, उनकी सेवा करना ही वास्तविक संवेदना है।

राजा मुचुकुंद के प्रसंग से उन्होंने जीवन में अपनों और समाज के लिए समय निकालने का संदेश दिया। वहीं लक्ष्मण-उर्मिला के प्रसंग में उन्होंने कहा कि हर जागते हुए लक्ष्मण के पीछे किसी न किसी उर्मिला का अनदेखा त्याग होता है। आज भी अनेक माता-पिता दिव्यांग बच्चों की सेवा में वर्षों तक रात-दिन जागते हैं। उनके जीवन का बोझ हल्का करना समाज का दायित्व है।

उन्होंने कहा कि जरूरतमंद को सहारा देना, पीड़ा कम करना और किसी के जीवन में उम्मीद जगाना ही सच्ची सेवा और भक्ति है। कथा के दौरान लाभान्वित दिव्यांग एवं परिजन मौजूद रहे।

By Udaipurviews

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