स्वर्ण नैनोमैटेरियल्स पर पीएचडी शोध सफलतापूर्वक पूर्ण, कीमोथेरेपी व फोटोथर्मल थेरेपी के संयुक्त उपयोग पर किया अनुसंधान
उदयपुर। जैव-चिकित्सीय अनुसंधान के क्षेत्र में ऐश्वर्या शर्मा छाजेड़ ने महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए स्वर्ण नैनोमैटेरियल्स के डिज़ाइन एवं विकास पर केंद्रित अपना पीएचडी शोध सफलतापूर्वक पूर्ण किया है। उनका शोध विशेष रूप से कैंसर उपचार के लिए उन्नत नैनोमैटेरियल आधारित चिकित्सीय प्रणालियों के विकास पर केंद्रित रहा।
ऐश्वर्या शर्मा छाजेड़ ने अपने शोधकार्य में ऐसे नैनोमैटेरियल आधारित प्लेटफॉर्म्स का अध्ययन किया, जिनके माध्यम से कीमोथेरेपी और फोटोथर्मल थेरेपी (पीटीटी) का संयुक्त उपयोग किया जा सके। इस अनुसंधान का उद्देश्य कैंसर उपचार के लिए अधिक प्रभावी एवं बहु-कार्यात्मक चिकित्सीय पद्धतियों की संभावनाओं का वैज्ञानिक अध्ययन करना रहा।
शोध-प्रबंध में नैनो-संरचनाओं के संश्लेषण एवं विश्लेषण, दवाओं की लोडिंग एवं डिलीवरी, फोटोथर्मल मूल्यांकन, स्थिरता संबंधी अध्ययन तथा जैविक परीक्षण शामिल रहे। इन सभी प्रक्रियाओं के माध्यम से स्वर्ण नैनोमैटेरियल्स की उन्नत चिकित्सीय प्रणालियों के रूप में उपयोगिता एवं संभावनाओं का मूल्यांकन किया गया।
यह शोधकार्य सुरेश ज्ञान विहार विश्वविद्यालय के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. कृष्ण कुमार के मार्गदर्शन एवं पर्यवेक्षण में पूर्ण हुआ। ऐश्वर्या शर्मा छाजेड़ की यह उपलब्धि कैंसर उपचार में नैनोप्रौद्योगिकी के संभावित उपयोग तथा जैव-चिकित्सीय अनुसंधान के क्षेत्र में उनके योगदान को रेखांकित करती है।
कैंसर उपचार में नई संभावनाओं की दिशा में ऐश्वर्या शर्मा छाजेड़ की शोध उपलब्धि
