कथनी-करनी में एकरूपता ही साधना का सच्चा संदेश
उदयपुर। वासुपूज्य मंदिर दादाबाड़ी में चल रहे नियमित आध्यात्मिक प्रवचन में सोमवार को साध्वी विद्युतप्रभा श्रीजी आदि ठाणा-6 ने पर्युषण महापर्व के आध्यात्मिक संदेश पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पर्युषण केवल बाहरी त्याग का पर्व नहीं, बल्कि स्वयं के भीतर परिवर्तन लाने का अवसर है। इन दिनों स्वयं के साथ सभी को आत्मसंयम और सद्विचारों की ट्रेनिंग दी जा रही है। संवत्सरी के साथ कषायों का भी उपवास करना चाहिए।
साध्वी श्रीजी ने कहा कि यदि जीवन में हल्कापन और प्रसन्नता चाहते हैं तो प्रतिदिन सुबह उठकर स्वयं से पूछें कि आज का दिन उदासी में बिताना है या प्रसन्न रहकर। इसका उत्तर अपने आप मिल जाएगा। उन्होंने कहा कि पर्युषण जीवन में परिवर्तन के लिए आता है। विचारों में सकारात्मक बदलाव आए, तभी पर्युषण का आना सार्थक है।
उन्होंने कहा कि बाहरी व्यवस्थाओं और सुख-सुविधाओं का त्याग करना अपेक्षाकृत आसान है, लेकिन अपने दुश्मन को मित्र के रूप में स्वीकार करना बहुत कठिन है। वास्तव में सबसे पहले तो किसी को अपना दुश्मन बनाना ही नहीं चाहिए। हमारी चेतना जब नियंत्रण से बाहर हो जाती है, तब यही सबसे बड़ी विडंबना बन जाती है। मन को साध लेना ही सबसे बड़ा तप है, जबकि मन यदि किसी दूसरे के नियंत्रण में है तो वही हमारा सबसे बड़ा दुश्मन बन जाता है।
साध्वी विद्युतप्रभा ने कहा कि पूर्व में गर्भ, नारी, ब्रह्म और गाय की हत्या नहीं करने जैसे संकल्प किए गए, लेकिन जब व्यक्ति अपने संकल्प के मार्ग पर आगे बढ़ता है तो अनेक बाधाएं सामने आती हैं। मुक्ति की राह में अपने पापों से भागना संभव नहीं है। पापों से भागने के बजाय उनका सामना करना चाहिए। यदि पश्चाताप हो रहा है और पापमुक्त होना चाहते हैं तो संयम का जीवन स्वीकार करना चाहिए। अपराध कर लेना आसान है, लेकिन जिन लोगों के बीच संकल्प लेकर संयमपूर्वक जीवन जीना है, वह कहीं अधिक कठिन है।
उन्होंने कहा कि अभिव्यक्ति और अनुभूति में अंतर होता है। यही नेता और संत के बीच का फर्क है। कहने और करने में अंतर हो तो वह नेतृत्व की शैली हो सकती है, लेकिन जिसकी कथनी और करनी एक हो, वही सच्चा साधक और संत कहलाता है। नेता आकर्षक बोलता है, जबकि संत अपने आचरण से प्रभाव डालता है। उन्होंने आह्वान किया कि कथनी और करनी को एकरूप बनाएं। यही पर्युषण महापर्व का वास्तविक संदेश है। इस अवसर पर साध्वी प्रज्ञानजना श्रीजी, साध्वी नमन रुचि श्रीजी, साध्वी योगरुचि श्रीजी एवं साध्वी तन्मय रुचि श्रीजी ने भक्तिमय गीत प्रस्तुत किए।
पर्युषण आत्मपरिवर्तन का पर्व, कषायों का भी करें उपवासःसाध्वी विद्युतप्रभा
