‘जयतु जननी जन्मभूमि भारतम्’ के स्वरों से गूंजा उदयपुर

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संस्कृत समूह गीत प्रतियोगिता में सुरों के संग साकार हुआ राष्ट्रप्रेम, संस्कृति और मातृभूमि का भावलोक
‘भारतं भवतु भारतम्’ और ‘सुरस सुबोधा विश्वमनोज्ञा…’ जैसी प्रस्तुतियों ने बांधा समां
उदयपुर, 1 सितंबर। कहीं मातृभूमि के लिए समर्पण का स्वर था, कहीं भारत की गौरवशाली संस्कृति का गुणगान और कहीं संस्कृत की मधुरिमा में राष्ट्रभक्ति का उफनता ज्वार। जब नन्हे-नन्हे कंठों से ‘जयतु जननी जन्मभूमि भारतम्’ और ‘भारतं भवतु भारतम्’ जैसे गीत गूंजे तो वातावरण संस्कृत की स्वर-माधुरी और राष्ट्रभावना से सराबोर हो उठा। अवसर था संस्कृतभारती उदयपुर की ओर से संस्कृत दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित संस्कृत सप्ताह के अंतर्गत मंगलवार को आलोक सीनियर सेकेंडरी स्कूल, हिरण मगरी सेक्टर-11 में आयोजित संस्कृत समूह गीत प्रतियोगिता का।
कार्यक्रम संयोजक श्रेयांश कंसारा ने बताया कि प्रतियोगिता में उदयपुर के विभिन्न विद्यालयों से आए विद्यार्थियों ने सामूहिक स्वरों में संस्कृत गीतों की ऐसी मनोहारी छटा बिखेरी कि सुर, शब्द और भाव एकाकार हो उठे। गीतों के माध्यम से विद्यार्थियों ने संस्कृत भाषा की लालित्यपूर्ण अभिव्यक्ति के साथ राष्ट्रप्रेम, मातृभूमि के प्रति समर्पण, साहस और भारतीय संस्कृति के गौरव को स्वर दिया। सामूहिक गायन में स्वर-सामंजस्य, भावाभिव्यक्ति और प्रस्तुति कौशल ने उपस्थित जनों को देर तक बांधे रखा।
प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने ‘तव भूमौ स्याद् बलिदानम् विकसेयमिव कुसुमं रम्यम्…’, ‘भारतं भारतं भवतु भारतम्’, ‘जयतु जननी जन्मभूमि भारतम्’, ‘सूरा वयम् धीरा वयम्…’ तथा ‘सुरस सुबोधा विश्वमनोज्ञा ललितार्त्या रमणीया…’ सहित विभिन्न संस्कृत गीतों की सुमधुर प्रस्तुतियां दीं। कहीं सुरों में शौर्य की गूंज सुनाई दी तो कहीं मातृभूमि के प्रति समर्पण की भावधारा प्रवाहित हुई। विद्यार्थियों की सामूहिक प्रस्तुति में संस्कृत के माधुर्य के साथ भारतीय जीवन-मूल्यों और सांस्कृतिक चेतना की सुंदर झलक दिखाई दी।
कार्यक्रम का शुभारंभ राजस्थान पत्रिका के उदयपुर  एडिटर राजीव जैन एवं आलोक संस्थान के निदेशक डॉ. प्रदीप कुमावत के आतिथ्य में हुआ। इस अवसर पर संस्कृतभारती के स्पीच संयोजक एवं आलोक के प्राचार्य शशांक टांक, प्रांत संपर्क प्रमुख डॉ  यज्ञ आमेटा, आदि
 शिक्षाविद्, निर्णायकगण, संस्कृतप्रेमी एवं विद्यालय परिवार के सदस्य उपस्थित रहे।
संस्कृत ज्ञान-परंपरा की आधारशिला : जैन – मुख्य अतिथि राजीव जैन ने संस्कृत की वैज्ञानिकता, समृद्ध शब्द-संपदा और भारतीय ज्ञान-परंपरा में उसके महत्त्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि संस्कृत केवल अतीत की भाषा नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक चेतना और ज्ञान-विरासत की महत्वपूर्ण आधारशिला है। उन्होंने विद्यार्थियों में संस्कृत के प्रति बढ़ती रुचि को सकारात्मक सांस्कृतिक परिवर्तन का संकेत बताते हुए कहा कि नई पीढ़ी का संस्कृत से जुड़ना अपनी जड़ों और ज्ञान-परंपरा से जुड़ने का भी माध्यम है।
प्रत्येक गुरुवार ‘संस्कृत दिवस’ : डॉ. कुमावत- आलोक संस्थान के निदेशक डॉ. प्रदीप कुमावत ने कहा कि आलोक संस्थान द्वारा प्रत्येक गुरुवार को ‘संस्कृत दिवस’ के रूप में मनाया जाना संस्कृत के प्रति संस्थान की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में सीबीएसई विद्यालयों की परंपरा के बीच विद्यालय स्तर पर संस्कृत के उत्थान और प्रचार-प्रसार के लिए की जा रही यह पहल विद्यार्थियों के साथ अन्य शिक्षण संस्थानों के लिए भी प्रेरणास्रोत बनेगी।
विशेषज्ञ निर्णायकों ने किया मूल्यांकन – प्रतियोगिता के निर्णायक मंडल में श्रीमती विमला आर्य, एम.ए. संगीत, मंचीय विधा प्रमुख, संस्कार भारती एवं संगीत विभाग, मीरा गर्ल्स महाविद्यालय, उदयपुर तथा डॉ. दुर्गा कुमावत, संस्कृत सहायक आचार्य, विद्या भवन गांधी शिक्षा अध्ययन संस्थान, बड़गांव, उदयपुर शामिल रहे। निर्णायकों ने प्रतिभागियों के स्वर-सामंजस्य, लय, भावाभिव्यक्ति, सामूहिक प्रस्तुति और मंचीय कौशल के आधार पर प्रस्तुतियों का मूल्यांकन किया।
शहर के विभिन्न विद्यालयों की उत्साहपूर्ण सहभागिता – प्रतियोगिता में सेंट्रल अकादमी सीनियर सेकेंडरी स्कूल, सेक्टर-5, उदयपुर, हैप्पी होम उच्च माध्यमिक विद्यालय, विटी इंटरनेशनल विद्यालय, आलोक सीनियर सेकेंडरी स्कूल सेक्टर-11, इंडो अमेरिकन पब्लिक स्कूल, रसिकलाल एम. धारीवाल पब्लिक विद्यालय, द स्कॉलर्स एरिना सीनियर सेकेंडरी इंग्लिश मीडियम स्कूल आर.के. पुरम, द विजन एकेडमी विद्यालय, नीरजा मोदी स्कूल, महाराणा मेवाड़ पब्लिक स्कूल, मिरांडा स्कूल, रयान इंटरनेशनल स्कूल, दिल्ली पब्लिक स्कूल उदयपुर, आलोक पंचवटी, विद्या भवन सीनियर सेकेंडरी स्कूल देबारी, संत जोसफ माध्यमिक विद्यालय, सीडलिंग मॉडर्न पब्लिक स्कूल उदयपुर, रॉकवुड्स हाई स्कूल चित्रकूट नगर, सेंट्रल अकादमी सी.सेक. स्कूल सरदारपुरा, गुरु नानक पब्लिक सी.से. स्कूल हिरण मगरी सेक्टर-4, संत एंथोनीज उच्च माध्यमिक विद्यालय, आलोक सीनियर सेकेंडरी स्कूल फतेहपुरा एवं राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय देबारी सहित उदयपुर के विभिन्न विद्यालयों के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।
इस अवसर पर संस्कृतभारती की ओर से डॉ. यज्ञ आमेटा, नरेंद्र शर्मा, दुष्यंत नागदा, चैनशंकर दशोरा, श्रीमती सत्यप्रिया, डॉ. रेणु पालीवाल, श्रीमती मीनाक्षी द्विवेदी, श्रीमती सुनीता कंवर एवं गौरव साहू सहित कई कार्यकर्ता एवं संस्कृतप्रेमी उपस्थित रहे। विद्यालय के शिक्षकों और संस्कृतभारती के कार्यकर्ताओं ने आयोजन की व्यवस्थाओं को सुचारू रूप से संभाला।
By Udaipurviews

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