मोह की कैद से निकलकर आत्मकल्याण की राह पर बढ़ेंःसाध्वी विद्युतप्रभा

उदयपुर व्यूज़ | ताजा खबरें

उदयपुर। वासुपूज्य मंदिर दादाबाड़ी में चल रहे आध्यात्मिक प्रवचन में साध्वी विद्युतप्रभा श्रीजी आदि ठाणा-6 ने रविवार को साधना, आत्मशुद्धि और संसार के मोह पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि परमात्मा की लगातार साढ़े बारह वर्ष की अखंड साधना का चिंतन करते हैं तो हृदय द्रवित हो उठता है। आज हम एक-दो घंटे भी निरंतर आराधना नहीं कर पाते। शरीर के लिए पसीना बहाने में पीछे नहीं हटते, लेकिन आत्मशुद्धि के लिए पुरुषार्थ करने में हमारा उत्साह कमजोर पड़ जाता है।
साध्वीश्री ने कहा कि संसार के प्रति हमारी आसक्ति इतनी गहरी है कि आत्मकल्याण का मार्ग दिखाई ही नहीं देता। जिस दिन संसार कैदखाना लगने लगेगा, उसी दिन आत्मा के कल्याण की शुरुआत होगी। उन्होंने कहा कि करोड़ों रुपये की संपत्ति होने के बावजूद यदि व्यक्ति बंधनों में जकड़ा है तो ऐसी संपत्ति किस काम की। जीवन में हम पहले शरीर की सुख-सुविधाओं और परिवार की चिंता करते हैं, लेकिन अपनी आत्मा के कल्याण को पीछे छोड़ देते हैं।
उन्होंने कहा कि व्यक्ति से अधिक उसके द्वारा अर्जित धन-संपत्ति से प्रेम करना मोह का प्रतीक है। अमीर व्यक्ति की मृत्यु के बाद लोग सबसे पहले उसकी वसीयत देखते हैं कि किसको क्या मिला। सच्चे प्रेम का उदाहरण राम और लक्ष्मण के संबंधों से लिया जा सकता है। मोह का नशा सबसे खतरनाक होता है तथा राग-द्वेष भी मोह के ही परिणाम हैं।
इस अवसर पर साध्वी प्रज्ञानजना श्रीजी, साध्वी नमन रुचि श्रीजी, साध्वी योगरुचि श्रीजी एवं साध्वी तन्मय रुचि श्रीजी ने भावपूर्ण गीत प्रस्तुत किया।

By Udaipurviews

Related Posts

error: Content is protected !!