उदयपुर। देवेंद्रधाम में आयोजित धर्मसभा में डॉ. सुरेंद्र मुनि ने कहा कि धर्म मनुष्य को जीवन जीने की सही दिशा और सकारात्मक सोच प्रदान करता है। ज्ञान को जीवन में उतारने के लिए मन में स्वीकार भाव होना आवश्यक है। परिस्थितियों को नकारने के बजाय सहजता से स्वीकार करने से व्यक्ति मजबूत बनता है और जीवन में शांति, संतोष व आत्मविश्वास का विकास होता है।
डॉ. राजेंद्र मुनि ने कहा कि शरीर परिवर्तनशील है, जबकि आत्मा शाश्वत है। मनुष्य को भौतिक सुखों के मोह में न फंसकर संयम, साधना और आत्मचिंतन के मार्ग पर चलना चाहिए। इससे कर्मबंधन से मुक्ति की दिशा में आगे बढ़ा जा सकता है। उन्होंने कहा कि अहंकार का त्याग कर विनम्रता अपनाने से जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आता है।
प्रवचन में उपाध्याय रमेशमुनि एवं दीपेश मुनि ने भी विचार रखे। बेंगलुरु, विजयनगर, गुजरात व पाली सहित विभिन्न क्षेत्रों से आए श्रद्धालुओं ने धर्मसभा का लाभ लिया।
स्वीकार भाव से दूर होता है अहंकार, धर्म देता है जीवन की सही दिशाःडॉ. सुरेंद्र मुनि
