अहिंसा और जीवदया से मानव कल्याण का संदेश, गौसेवा को बताया धर्म का श्रेष्ठ स्वरूप

उदयपुर व्यूज़ | ताजा खबरें

उदयपुर। श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ, उदयपुर की ओर से मरुधर केसरी श्री मिश्रीमल जी महाराज व लोकमान्य संत श्री रूपचंद जी महाराज साब की जयंती के अवसर पर आयोजित धर्मसभा में बोलते हुए डॉ सुरेंद्र मुनि ने धर्म, अहिंसा, जीवदया एवं समाजसेवा के महत्व पर प्रकाश डाला गया। देवेंद्र धाम स्थित महावीर समवशरण में आयोजित धर्मसभा में डॉ सुरेंद्र मुनि ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि मानव जीवन का वास्तविक उद्देश्य केवल स्वयं के कल्याण तक सीमित नहीं, बल्कि प्राणीमात्र की सेवा और कल्याण में निहित है।
उन्होंने बताया कि अहिंसा, करुणा और जीवदया भारतीय संस्कृति एवं जैन दर्शन की मूल भावना है। धार्मिक एवं सामाजिक जीवन में इन मूल्यों को अपनाकर समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाया जा सकता है। शिक्षक नेता भंवर सेठ ने कहा कि राजस्थान की पावन धरा ने अनेक संतों और महापुरुषों को जन्म दिया है, जिन्होंने अपना जीवन मानव सेवा, जीवदया और लोककल्याण के कार्यों में समर्पित किया। सभा में अनिल पूनमिया द्वारा गौसेवा के महत्व पर भी विशेष रूप से प्रकाश डाला गया।
प्रवर्तक डॉ राजेंद्र मुनि ने बताया विभिन्न स्थानों पर गौशालाओं के माध्यम से गौमाता के पालन-पोषण एवं संरक्षण का कार्य निरंतर किया जा रहा है। श्रद्धालुओं एवं समाजसेवियों द्वारा सेवा कार्यों में सहयोग देकर जीवदया की भावना को मजबूत किया जा रहा है।
वक्ताओं ने कहा कि सेवा और परोपकार के कार्यों में समाज की सहभागिता निरंतर बढ़ रही है। धार्मिक प्रेरणा से अनेक स्थानों पर सेवा धाम, चिकित्सालय, छात्रावास, जैन स्थानक तथा अन्य समाजोपयोगी भवनों का निर्माण हुआ है, जो समाज के लिए उपयोगी सिद्ध हो रहे हैं।
धर्मसभा में श्रद्धालुओं से आह्वान किया गया कि वे अहिंसा, संयम, जीवदया और सेवा को अपने जीवन का हिस्सा बनाएं तथा समाज एवं प्राणीमात्र के कल्याण के लिए निरंतर कार्य करें। कार्यक्रम पुष्प भक्ति ग्रुप द्वारा सुंदर भजन अंजलि समर्पित की गई महामंत्री वडाला एवं अध्यक्ष रोशन लाल जैन ने श्रद्धा की अभिव्यक्ति प्रदान की जन्म जयंती समारोह में बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाओं ने उपस्थित होकर धर्मलाभ लिया।

By Udaipurviews

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