अंतरिक्ष विज्ञान पर 19 अगस्त , बुधवार को होगा विद्या भवन ऑडिटोरियम में कार्यक्रम
देश के प्रतिष्ठित वैज्ञानिक करेंगे विद्यार्थियों से संवाद
उदयपुर, 17 अगस्त 2026। भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक एवं महान वैज्ञानिक डॉ. विक्रम साराभाई की स्मृति में सोमवार को विद्या भवन पॉलिटेक्निक, उदयपुर में “विकसित भारत की ओर भारत की अंतरिक्ष यात्रा : डॉ. विक्रम साराभाई की दूरदृष्टि से नई उड़ान तक” विषय पर विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। इसी क्रम में भारतीय अंतरिक्ष दिवस कार्यक्रम श्रृंखला में आगामी बुधवार को वृहद कार्यक्रम विद्या भवन ऑडिटोरियम में आयोजित होगा।
सोमवार को आयोजित कार्यक्रम के प्रारंभ में पॉलिटेक्निक प्राचार्य डॉ. अनिल मेहता ने बताया कि 12 अगस्त को डॉ. विक्रम साराभाई जयंती तथा 23 अगस्त—राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस के रूप में मनाया जाता है। यह बारह दिन अंतरिक्ष विज्ञान में भारत की प्रगति को समर्पित है। उन्होंने कहा कि डॉ. साराभाई की दूरदृष्टि से शुरू हुई भारत की अंतरिक्ष यात्रा आज चंद्रमा तक पहुँच चुकी है। चंद्रयान-3 की ऐतिहासिक सफलता का उल्लेख करते हुए उन्होंने चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र में स्थित लैंडिंग स्थल को ‘शिव शक्ति पॉइंट’ के रूप में पहचान मिलने को भारत के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि बताया।
मुख्य वक्ता डॉ. भुवन जोशी, उप प्रमुख, उदयपुर सौर वेधशाला, भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला (पी आर एल) ने भारत की अंतरिक्ष यात्रा को डॉ. साराभाई की दूरदृष्टि से जोड़ते हुए देश की वर्तमान वैज्ञानिक एवं तकनीकी उपलब्धियों पर प्रकाश डाला।
डॉ. जोशी ने चंद्रयान-3 की सफल सॉफ्ट लैंडिंग और मिशन के वैज्ञानिक एवं तकनीकी महत्व को विशेष रूप से रेखांकित किया। उन्होंने विक्रम लैंडर और प्रज्ञान रोवर के प्रमुख वैज्ञानिक उपकरणों तथा उनके माध्यम से किए गए चंद्रमा के अध्ययन को विद्यार्थियों के लिए सरल एवं रोचक तरीके से समझाया। उन्होंने बताया कि चंद्रयान-3 ने न केवल भारत की चंद्रमा पर सुरक्षित लैंडिंग की क्षमता को प्रदर्शित किया, बल्कि चंद्र सतह पर वैज्ञानिक प्रयोगों के माध्यम से महत्वपूर्ण जानकारी भी प्राप्त की।
डॉ. जोशी ने विद्यार्थियों को उदयपुर सौर वेधशाला की वैज्ञानिक यात्रा से परिचित कराया। उन्होंने बताया कि प्रख्यात सौर वैज्ञानिक डॉ. अरविंद भटनागर द्वारा स्थापित उदयपुर सौर वेधशाला इस वर्ष अपनी स्वर्ण जयंती मना रही है। उन्होंने सूर्य पर होने वाले विशाल विस्फोटों और उनसे निकलने वाले अत्यधिक ऊर्जावान प्लाज्मा तथा चुंबकीय क्षेत्रों के अंतरिक्ष में फैलने और पृथ्वी के निकट अंतरिक्ष मौसम को प्रभावित करने की प्रक्रिया को रोचक उदाहरणों के माध्यम से समझाया।
डॉ. जोशी ने भारत के प्रथम समर्पित सौर मिशन आदित्य एल 1 के प्रक्षेपण और उसके वैज्ञानिक उद्देश्यों पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने विद्यार्थियों को समझाया कि सूर्य का अध्ययन केवल खगोल विज्ञान की दृष्टि से ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि सौर गतिविधियों का पृथ्वी के संचार, उपग्रहों, नेविगेशन प्रणालियों और अंतरिक्ष अभियानों पर भी प्रभाव पड़ता है।
डॉ. जोशी ने विद्यार्थियों के साथ संवाद करते हुए भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम में करियर की संभावनाओं पर भी चर्चा की। उन्होंने विज्ञान, इंजीनियरिंग और तकनीकी शिक्षा प्राप्त कर रहे युवाओं के लिए अंतरिक्ष क्षेत्र में उपलब्ध विभिन्न अवसरों की जानकारी दी।
इस अवसर पर उदयपुर सौर वेधशाला के वैज्ञानिक-इंजीनियर कुशाग्र उपाध्याय ने डिप्लोमा तथा स्नातक स्तर के इंजीनियरिंग विद्यार्थियों के लिए इसरो तथा भारतीय अंतरिक्ष क्षेत्र में उपलब्ध करियर अवसरों के बारे में जानकारी दी।
डॉ जोशी तथा डॉ मेहता ने बताया कि किशोरों, युवाओं में विज्ञान एवं अंतरिक्ष अनुसंधान के प्रति रुचि बढ़ाने के उद्देश्य से 19 अगस्त, बुधवार को विद्या भवन ऑडिटोरियम में अंतरिक्ष विज्ञान आउटरीच श्रृंखला का अगला कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इसमें अंतरिक्ष विज्ञान से संबंधित कार्यशील मॉडल एवं विशेष व्याख्यान होंगे। कार्यक्रम में इसरो के क्षेत्रीय सुदूर संवेदन केंद्र जोधपुर के निदेशक, उदयपुर सौर वेधशाला के वैज्ञानिक तथा स्पेस एप्लीकेशन सेंटर अहमदाबाद के वरिष्ठ वैज्ञानिक विद्यार्थियों से संवाद करेंगे।
