राष्ट्र के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करने का दिवस है आज – विधायक उदयलाल डांगी

उदयपुर व्यूज़ | ताजा खबरें

विद्यापीठ में 80वां स्वाधीनता दिवस धूमधाम से मनाया
राष्ट्र निर्माण का जिम्मा शिक्षकों के कंधों पर – प्रो. मंजु मांडोत

उदयपुर, 16 अगस्त। राजस्थान विद्यापीठ के श्रमजीवी महाविद्यालय, प्रतापनगर एवं डबोक परिसर में शनिवार को 80वां स्वाधीनता दिवस हर्षोल्लास और देशभक्ति की भावना के साथ मनाया गया। मुख्य समारोह डबोक परिसर स्थित बीएड महाविद्यालय के प्रांगण में आयोजित हुआ। समारोह में मुख्य अतिथि वल्लभनगर विधायक उदयलाल डांगी, कुलपति प्रो. मंजु मांडोत एवं प्राचार्या प्रो. सरोज गर्ग ने ध्वजारोहण कर परेड की सलामी ली। इस दौरान विद्यार्थियों ने राजस्थानी लोकगीतों एवं देशभक्ति गीतों पर आकर्षक सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देकर उपस्थितजनों का मन मोह लिया।

माणिक्यलाल वर्मा श्रमजीवी महाविद्यालय में प्रो. मलय पानेरी ने ध्वजारोहण किया। सभी परिसरों में विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं कर्मचारियों ने राष्ट्रगान के साथ देश की एकता, अखंडता एवं संप्रभुता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की।

राष्ट्र के प्रति कृतज्ञता का दिवस – विधायक डांगी

मुख्य अतिथि विधायक उदयलाल डांगी ने कहा कि स्वाधीनता दिवस राष्ट्र के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करने का दिवस है। हजारों स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग, संघर्ष और बलिदान के कारण आज हम आजाद भारत में सांस ले रहे हैं। मां भारती को ब्रिटिश जंजीरों से मुक्त कराने के लिए वीर बांकुरों ने अपने प्राणों तक की आहुति दी। स्वाधीनता दिवस उन महान सेनानियों को स्मरण करने और उनके आदर्शों को जीवन में उतारने का अवसर है।

उन्होंने कहा कि राष्ट्रभाव के बिना देश को परम वैभव तक नहीं पहुंचाया जा सकता। हमारा संकल्प होना चाहिए कि मानव को महामानव कैसे बनाया जाए और युवा पीढ़ी में राष्ट्र के प्रति समर्पण, सेवा तथा जिम्मेदारी का भाव विकसित किया जाए।

राष्ट्र निर्माण का जिम्मा शिक्षकों के कंधों पर – प्रो. मंजु मांडोत

कुलपति प्रो. मंजु मांडोत ने कहा कि राष्ट्र निर्माण के लिए राष्ट्रीय चरित्र के साथ वैदिक    दृष्टिकोण की नितांत आवश्यकता है। वर्तमान समय में इसकी प्रासंगिकता और अधिक बढ़ गई है। समाज एवं नई पीढ़ी को संकुचित विचारधारा से बाहर निकालकर वर्ग और वर्ण भेद से रहित वसुधैव कुटुम्बकम् की भावना को प्रतिष्ठित करने में वैदिक दृष्टिकोण महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

उन्होंने कहा कि किसी भी राष्ट्र की उन्नति और प्रगति उसकी शिक्षा व्यवस्था पर निर्भर करती है। राष्ट्र निर्माण का महत्वपूर्ण दायित्व शिक्षकों के कंधों पर है। शिक्षक युवाओं को नवाचार, आधुनिक तकनीक और कौशल आधारित ज्ञान से जोड़कर उन्हें वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करें, ताकि भारत अपनी प्रतिष्ठा और सामर्थ्य के साथ विश्व पटल पर मजबूती से खड़ा रह सके। कार्यक्रम का संचालन डॉ. हीना खान एवं डॉ. हरीश चौबीसा ने किया।

समारोह में परीक्षा नियंत्रक डॉ. पारस जैन, प्रो. जी.एम. मेहता, डॉ. भवानीपाल सिंह राठौड़, प्रो. मलय पानेरी, डॉ. अमीया गोस्वामी, डॉ. शैलेन्द्र मेहता, प्रो. अवनिश नागर, प्रो. हेमेन्द्र चौधरी, डॉ. रचना राठौड़, प्रो. अमी राठौड़, डॉ. मनीष श्रीमाली, प्रो. सुनीता मुर्डिया, डॉ. एस.बी. नागर, प्रो. लालाराम जाट, डॉ. प्रकाश धाकड़, डॉ. दिलीप सिंह चौहान, आरिफ मोहम्मद, आशीष नंदवाना, डॉ. सपना श्रीमाली, डॉ. गुणबाला आमेटा, डॉ. बलिदान जैन, डॉ. भुरालाल श्रीमाली एवं डॉ. अपर्णा श्रीवास्तव सहित विद्यापीठ के डीन, डायरेक्टर, शिक्षक, कार्यकर्ता एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।

By Udaipurviews

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