परिवर्तन जीवन का स्वभाव, बुराई और गलत संगति छोड़ आत्मकल्याण की राह अपनाने का संदेश
उदयपुर। वासुपूज्य मंदिर दादाबाड़ी में चल रहे आध्यात्मिक प्रवचन में साध्वी विद्युतप्रभा श्रीजी आदि ठाणा-6 ने कहा कि भगवान महावीर ने केवल्य ज्ञान प्राप्त करने के बाद प्रत्येक व्यक्ति को शुद्ध और बुद्ध बनाने का लक्ष्य रखा। उन्होंने कहा कि जीवन में परिवर्तन स्वाभाविक है और परिस्थितियों के साथ व्यक्ति के विचार, आचरण और जीवनशैली में भी बदलाव आ सकता है।
साध्वी श्री ने संत वाल्मीकि का उदाहरण देते हुए कहा कि जो व्यक्ति कभी डाकू था, वही परिवर्तन के बाद महान संत बन गया। इसी प्रकार परमात्मा के वचनों से एक चोर के जीवन में भी परिवर्तन आया। उन्होंने कहा कि हमारे जीवन में भी परिवर्तन की ऐसी लहर उठनी चाहिए कि मन में परमात्मा के प्रति प्रेम और समर्पण का भाव जागृत हो।
उन्होंने सांप की केंचुली का उदाहरण देते हुए कहा कि जिस प्रकार सांप पुराना आवरण छोड़कर पीछे मुड़कर नहीं देखता, उसी प्रकार मनुष्य को भी बुराइयों, गलत संगति और धोखे से दूरी बनाकर जीवन को नई दिशा देनी चाहिए। संसार में शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति हो, जिसे कभी किसी ने धोखा न दिया हो। ऐसे में विवेक के साथ जीवन जीना आवश्यक है।
साध्वी विद्युतप्रभा ने कहा कि मनुष्य संसार में मेहमान बनकर आया है। संसार अंतिम मंजिल नहीं, बल्कि यात्रा का एक पड़ाव है। जिस प्रकार यात्रा के दौरान मिले सुख-सुविधाओं में व्यक्ति अपनी पूरी पूंजी नहीं गंवाता, उसी प्रकार मनुष्य को भी संसार की मोह-माया में अपना जीवन व्यर्थ नहीं गंवाना चाहिए। जीवन का वास्तविक उद्देश्य आत्मकल्याण और परमात्मा की ओर बढ़ना है।
प्रवचन से पूर्व साध्वी प्रज्ञानजना श्रीजी, नमनरुचि श्रीजी, योगरुचि श्रीजी एवं तन्मय रुचि श्रीजी ने मंगलाचरण किया।
संसार मंजिल नहीं, सिर्फ पड़ाव है,मन को परमात्मा की ओर लगाएंःसाध्वी विद्युतप्रभा
