उदयपुर। विशिष्ट न्यायिक मजिस्ट्रेट (एनआई एक्ट प्रकरण) न्यायालय संख्या-08, उदयपुर की पीठासीन अधिकारी चेताली गोयल ने चेक अनादरण के एक मामले में अभियुक्त राजेश पुत्र धर्मदेव निवासी होली चौक रोड पानेरियों की मादडी हिरणमगरी सेक्टर—6 को दोषी करार देते हुए एक वर्ष के साधारण कारावास तथा परिवादी को 5 लाख रुपए क्षतिपूर्ति राशि अदा करने का आदेश दिया है। प्रकरण के अनुसार परिवादी जयेश पुत्र हरपालसिंह निवासी शक्तिनगर ने न्यायालय में परिवाद प्रस्तुत कर बताया कि अभियुक्त राजेश पुत्र धर्मदेव के साथ उसकी अच्छी जान-पहचान थी तथा उसकी आवश्यकता पर 4 लाख रुपए उधार दिए थे। उक्त राशि के भुगतान के लिए अभियुक्त ने 14 मार्च 2013 का 4 लाख रुपए का चेक दिया था। चेक बैंक में प्रस्तुत करने पर अनादरित हो गया। अभियुक्त के अनुरोध पर चेक को पुनः बैंक में प्रस्तुत किया गया, लेकिन दूसरी बार भी बैंक ने उसे अपर्याप्त धनराशि की टिप्पणी के साथ वापस लौटा दिया। इसके बाद परिवादी ने विधिक नोटिस भिजवाया, किंतु नोटिस प्राप्त होने के बावजूद अभियुक्त ने निर्धारित अवधि में भुगतान नहीं किया। इसके बाद परिवादी की ओर से अधिवक्ता आशीष कोठारी, विनय सारस्वत, सुनील कल्याणा एवं मनीष कुमार चौबीसा ने न्यायालय में परिवाद प्रस्तुत किया। विचारण के दौरान परिवादी ने मूल चेक, बैंक रिटर्न मेमो, विधिक नोटिस एवं डाक रसीद सहित दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत किए। वहीं अभियुक्त ने न तो परिवादी से जिरह की और न ही अपने बचाव में कोई मौखिक अथवा दस्तावेजी साक्ष्य पेश की। धारा 313 दण्ड प्रक्रिया संहिता के तहत उसने केवल इतना कहा कि उसके विरुद्ध झूठा मामला दर्ज किया गया है। न्यायालय ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर माना कि अभियुक्त राजेश धारा 139 परक्राम्य लिखत अधिनियम के तहत उत्पन्न वैधानिक उपधारणा का खंडन करने में असफल रहा तथा धारा 138 परक्राम्य लिखत अधिनियम के तहत अपराध सिद्ध होता है। दोषसिद्धि के बाद न्यायालय ने अभियुक्त राजेश पुत्र धर्मदेव को एक वर्ष के साधारण कारावास से दंडित करते हुए 5 लाख रुपए बतौर क्षतिपूर्ति परिवादी को अदा करने का आदेश दिया है। प्रकरण में परिवादी की ओर से अधिवक्ता आशीष कोठारी, विनय सारस्वत, सुनील कल्याणा एवं मनीष कुमार चौबीसा ने पैरवी की।
चेक अनादरण मामले में अभियुक्त को 1 वर्ष का कारावास
