सुरों की मंडली ने विश्व संगीत दिवस पर बांधा समां
उदयपुर। विश्व संगीत दिवस के अवसर पर सुरों की मंडली संस्था वरिष्ठ विंग द्वारा मधुश्री बैंक्वेट हॉल, अशोका पैलेस, शोभागपुरा में संगीत सम्मान समारोह आयोजित किया गया। समारोह में संगीत एवं संस्कृति के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले कलाकारों, संगीत साधकों तथा संगीत पहेली प्रतियोगिता के विजेताओं का सम्मान किया गया। कार्यक्रम में संगीत प्रेमियों एवं गणमान्य नागरिकों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही।
संस्था के संस्थापक अध्यक्ष मुकेश माधवानी ने बताया कि समारोह में वरिष्ठ ग़ज़ल गायक डॉ. प्रेम भंडारी को संगीत एवं ग़ज़ल गायन के क्षेत्र में उनके विशिष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया गया। डॉ. भंडारी ने अपनी सशक्त गायकी एवं उत्कृष्ट प्रस्तुतियों के माध्यम से वर्षों से संगीत प्रेमियों के बीच विशेष पहचान बनाई है।
समारोह में संगीत जगत की विशिष्ट विभूति स्वर्गीय सुधाकर पियूष को उनके आजीवन एवं बहुआयामी योगदान के लिए मरणोपरांत लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड प्रदान किया गया। यह सम्मान उनके परिजनों ने ग्रहण किया। स्वर्गीय पियूष ने वर्ष 1975 में उदयपुर का पहला ऑर्केस्ट्रा ग्रुप ‘यूजी-एम ग्रुप’ स्थापित किया था। उन्होंने स्थानीय प्रतिभाओं को मंच प्रदान करने के लिए ‘नन्हे सितारे’ श्रृंखला की शुरुआत की, राजस्थानी संगीत को नई पहचान दिलाई तथा बॉलीवुड एवं हॉलीवुड के कलाकारों के साथ भी कार्य किया। संगीत एवं सांस्कृतिक क्षेत्र में उनके योगदान को उपस्थित जनों ने भावपूर्ण श्रद्धांजलि के साथ स्मरण किया।
इनके अतिरिक्त देवेंद्र सिंह हिरण, फैय्याज खान, मारिषा दीक्षित, के.के. त्रिपाठी, इंद्रदेव पीयूष एवं कैलाश केवलिया को सम्मान पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम में सुरों की मंडली द्वारा आयोजित संगीत पहेली प्रतियोगिता के 11 विजेताओं को भी सम्मानित किया गया। सम्मानित प्रतिभागियों में हेमा जोशी, गीता राठौड़, निखिल माहेश्वरी, हरीश भाटिया, नीलम पटवा, आराध्या वैष्णव, पंडित प्रकाश परसाई, मोहित माथुर, नलिनी बंधु, एच. क़ाज़ी एवं राजकुमार बापना शामिल रहे।
संगीतमय संध्या में कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से श्रोताओं का मन मोह लिया। हेमा जोशी ने “चांदी जैसा रंग है तेरा”, एच. क़ाज़ी ने “लहरों की तरह यादें”, तथा राजकुमार बापना ने “पंख होते तो उड़ आती रे” गीत प्रस्तुत किया। दिलीप घबरानी ने सिंधी गीत की प्रस्तुति दी, जबकि गरिमा जोशी एवं मृणाल जोशी ने अंग्रेज़ी गीतों से कार्यक्रम में विशेष रंग भरा। अशोक परियानी ने ग़ज़ल प्रस्तुत की। वहीं राजकुमार दीक्षित, मनोहर लाल मुखिया, के.के. खंडेलवाल एवं आराध्या वैष्णव ने हारमोनियम वादन से अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। गीता राठौड़ सहित अन्य कलाकारों की प्रस्तुतियों ने भी दर्शकों की खूब सराहना बटोरी।
इस अवसर पर आयोजन समिति की हेमा जोशी, एच. क़ाज़ी एवं राजकुमार बापना ने बताया कि विश्व संगीत दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित इस समारोह का उद्देश्य संगीत साधकों के योगदान को सम्मानित करना तथा नई पीढ़ी को संगीत और संस्कृति से जोड़ना है।
संस्था के सचिव अरुण चौबीसा ने बताया कि कार्यक्रम में शहर के संगीत प्रेमियों, कलाकारों एवं गणमान्य नागरिकों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही तथा सांगीतिक प्रस्तुतियों ने समारोह को यादगार बना दिया।
कोषाध्यक्ष योगेश उपाध्याय ने बताया कि सुरों की मंडली द्वारा समय-समय पर ऐसे आयोजन किए जाते हैं, जिनका उद्देश्य संगीत प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करना तथा समाज में संगीत एवं संस्कृति के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।
