संसार की चाह नहीं, आत्मशुद्धि की राह बने जीवन का लक्ष्यःसाध्वी विद्युतप्रभा श्रीजी
धर्म की क्रिया से अधिक महत्वपूर्ण है उसके पीछे की भावना और उद्देश्य उदयपुर। वासुपूज्य मंदिर दादाबाड़ी में आयोजित आध्यात्मिक प्रवचन में साध्वी विद्युतप्रभा श्रीजी आदि ठाणा-6 ने मंगलवार को कहा कि धर्म साधना तभी सार्थक होती है, जब उसके पीछे आत्मशुद्धि की भावना और स्पष्ट उद्देश्य हो। परमात्मा ने केवल्य ज्ञान प्राप्त करने के बाद अपने पुरुषार्थ से अनादिकाल से आत्मा पर जमे कर्मरूपी मैल को दूर किया। हमें भी आत्मा को निर्मल बनाने के लिए अपनी रुचि और जीवन के लक्ष्य को बदलना होगा। साध्वीश्री ने कहा कि सफेद कपड़े को एक माह पहनने के बाद साफ करने…
