70 झांकियों और 11 रजत पालकियों के साथ निकली भव्य शाही सवारी
उदयपुर। श्रावण मास के चतुर्थ सोमवार को अभिजित मुहूर्त में आशुतोष भगवान श्री महाकालेश्वर अर्धनारीश्वर स्वरूप में रजत पालकी पर विराजमान होकर नगर भ्रमण पर निकले। महाकालेश्वर की शाही सवारी में इस वर्ष 70 आकर्षक झांकियां शामिल हुईं। नंदी पर सवार महादेव, सिंह पर विराजित मां पार्वती, कार्तिकेय, विघ्नहर्ता गणेश, मां महाकाली और भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करती मां अन्नपूर्णा की झांकियां श्रद्धालुओं के आकर्षण का प्रमुख केन्द्र रहीं।


देवदण्ड दर्शन यात्रा बनी विशेष आकर्षण
शाही सवारी में देवदण्ड दर्शन यात्रा ने विशेष आकर्षण पैदा किया। नंदी, गौमाता व उनके वत्स, हाथी-घोड़े तथा 11 रजत पालकियों ने यात्रा की भव्यता बढ़ाई। इनोवा कारों पर प्रभु एकलिंगनाथ, मां ललिता, अम्बा, गोपाल, महामृत्युंजय यंत्र और श्रीयंत्र की पालकियां सजाई गईं। गोल्फ कारों में महादेव की जटाओं से जुड़ी भव्य शिव बारात, भगवान शिव-विष्णु द्वारा त्रिशूल और सुदर्शन चक्र के आदान-प्रदान तथा अर्धनारीश्वर और शिव परिवार के मनोहारी चित्र प्रदर्शित किए गए। विंटेज कार में प्रभु श्रीनाथजी के मंगला स्वरूप के दर्शन भी विशेष आकर्षण रहे।

महादेव के जयकारों से गूंजा शहर
श्रावण महोत्सव समिति के पुरुषोत्तम जीनगर ने बताया कि शाही सवारी में मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम, प्रभु हनुमान, विश्वकर्मा, भगवान परशुराम और परम शिवभक्त देहदानी महर्षि दधीचि की झांकियां भी शामिल रहीं। आदियोगी शिव, दण्डनायक यम और ध्यानयोगी महादेव की झांकियों के साथ 11 घोड़े शाही सवारी की शोभा बढ़ा रहे थे। शहर के वातावरण को शुद्ध करने के उद्देश्य से औषधीय हवन सामग्री से लघु रुद्र पाठ भी किया गया।
महाआरती के बाद शुरू हुआ नगर भ्रमण
इससे पूर्व दोपहर 12.15 बजे मंदिर के मुख्य सभागार में विप्र समाज की ओर से महाआरती की गई। आरती के बाद शाही लवाजमे के साथ गर्भगृह के मूल स्वरूप के दर्शन कराए गए। मंदिर सभागार के उत्तरी द्वार से गुफा मार्ग होते हुए शाही सवारी गंगा घाट पहुंची और वहां से नगर भ्रमण के लिए रवाना हुई। मार्ग में गौमूत्र का छिड़काव तथा भक्तों द्वारा रास्ते की सफाई करते हुए प्रभु का स्वागत किया गया।
महाकाली से हुआ मिलन, जगदीश मंदिर में हरि-हर का संगम
फतहसागर मार्ग से शिक्षा भवन चौराहा पहुंचने पर प्रभु की रजत पालकी का उनके परम शिष्य शनि महाराज ने स्वागत किया। पहाड़ी टैक्सी स्टैंड पर पूजन, स्तवन और भेंट की रस्म हुई। इसके बाद चेतक मार्ग से शाही सवारी शहर में प्रवेश कर गई, जहां विभिन्न समाजों और संस्थाओं ने स्वागत किया।
हाथीपोल स्थित महाकाली मंदिर के सामने बनाए गए विशाल मंच पर महाकाल और महाकाली का परस्पर मिलन, पूजन, स्तवन और आरती हुई। इसके बाद हाथीपोल स्थित मावा गणेशजी पर विशेष अर्चना की गई। मोती चौहट्टा होते हुए शाही सवारी जगदीश मंदिर पहुंची, जहां हरि और हर का अद्भुत मिलन हुआ। हरि स्वरूप भगवान को श्वेत कमल अर्पित कर शिव नामावली से विशेष पूजन-स्तवन किया गया।
महाप्रसादी से हुआ आयोजन का समापन
श्री महाकाल मंदिर के 29वें शिला स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में शाम 5 बजे मंदिर परिसर में भव्य महाप्रसादी का आयोजन भी किया गया। पूरे आयोजन में धार्मिक आस्था, संस्कृति और परंपरा का अद्भुत संगम देखने को मिला तथा महाकाल के जयकारों से उदयपुर का वातावरण भक्तिमय बना रहा।
