अंतरिक्ष हो या खेत, भारत का वैज्ञानिक श्रेष्ठः डाॅ. परोदा

उदयपुर व्यूज़ | ताजा खबरें

आबादी चार गुना बढ़ी तो देश का खाद्यान्न उत्पादन साढे़ छह गुणा बढ़ा
उदयपुर, 30 अगस्त(ब्यूरो): अंतरिक्ष हो या खेत- भारत के वैज्ञानिकों ने हर जगह देश का गौरव बढ़ाया है। आजादी के बाद आबादी में साढे चार गुना वृद्धि हुई है तो कृषि वैज्ञानिकों ने खाद्यान्न उत्पादन में साढे छह गुणा बढ़ोतरी कर अपने हुनर का लोहा मनवाया है। अब कृषि वैज्ञानिकों को इस बात पर ध्यान केन्द्रित करना होगा कि आदान की कीमतें घटे व उत्पादन बढ़े। साथ ही उत्पादन को सीधा बाजार से जोड़ा जाए और यह कमान युवा वैज्ञानिकों को सौंपी जाए। यह बात बुधवार को पद्म भूषण से सम्मानित एवं भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद्, नई दिल्ली के पूर्व महानिदेशक एवं चेयरमेन ‘टास’ डाॅ. आर. एस. परोदा ने कही।
राजस्थान कृषि महाविद्यालय सभागार में आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय गेहूँ व जौ अनुसंधान कार्यशाला के समापन समारोह के मुख्य अतिथि डाॅ. परोदा ने कहा कि हर बच्चा सपना देखे, लेकिन सोच वैश्विक रखे।
उन्होंने कहा कि खाद्यान्न उत्पादन में देश प्रतिवर्ष 5-6 मिलियन टन की वृद्धि कर रहा है। साथ ही 50 से 70 मिलियन टन का बफर स्टाॅक भी आज हमारे पास है ताकि कोई भी विपत्ति आए तो देश में अनाज की कमी नहीं रहे। परोदा का कहना था कि राजस्थान जैसे मरूप्रदेश में मूंग, मोठ, बाजरा, मैथी व जीरा आदि की भरपूर पैदावार होती है। पाली में तैयार गेहूँ ‘खरचीय-65’ क्षाररोधी है जिसका भौगोलिक पेटेन्ट भी करा लिया गया है। हमारे पास भरपूर पानी है, उत्कृष्ट बीज है, श्रेष्ठ उर्वरक है, श्रेष्ठतम कृषि वैज्ञानिक है, विशाल सोच है और आई.सी.ए.आर. है तो फिर इन सबका उपयोग कर देश को और आगे ले जाने व नए कीर्तिमान स्थापित करने का काम होना चाहिए। उन्होंने इस बात पर गर्व किया कि वे स्वयं राजस्थान कृषि महाविद्यालय के पूर्व छात्र रहे हैं और जो सपने उन्होंने देखे मूर्त रूप में साकार होते भी देखा है।
उन्होंने युवा छात्रों और कृषि क्षेत्र में काम कर रहे नौजवान वैज्ञानिकों से कहा कि अब बारी उनकी है। देश के युवा वैज्ञानिकों को चाहिए कि संरक्षित कृषि को बाजार से जोडें।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए पूर्व उप महानिदेशक आई.सी.ए.आर. एवं पूर्व कुलपति, गोविन्द वल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय पंतनगर, डाॅ. पी.एल. गौतम ने कहा कि बच्चों में शुरू से ही शिक्षा के अलावा उद्यमिता पर जोर देना चाहिए। इससे न केवल समग्र विकास होगा बल्कि वे देश की तरक्की में अपनी भागीदारी सुनिश्चित कर सकेंगे। युवा कृषि वैज्ञानिक इसी रफ्तार से अपने कर्म में जुटे रहेंगे तो सुपरिणाम मिले है और भी सुखद परिस्थितियाँ बनेंगी।
महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के कुलपति डाॅ. अजीत कुमार कर्नाटक ने प्रातः स्मरणीय महाराणा प्रताप के त्याग, देशप्रेम को आत्मसात करते हुए युवा वैज्ञानिकों का आह्वान किया कि वे सतत् शोध अनुसंधान करते हुए खाद्यान्न उत्पादन में देश को नई ऊंचाईयां प्रदान करें। उनका कहना था कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा में गेहूँ का अविस्मरणीय योगदान है। गेहूँ से जुडे़ समसायिक मुद्दे यथा प्राकृतिक खेती, खाद्य उत्पादों में गेहूँ का समावेश, बाॅयो फोर्टिफिकेशन, पारिस्थिकी तंत्र, स्वास्थ्य, जैविक व अजैविक तनाव आदि पर भी ध्यान देना जरूरी है। कुलपति ने कहा कि युवा वैज्ञानिकों को गेहूँ व जौ उत्पादन से जुड़े किसानों की समस्याओं का अध्ययन कर उनके समाधान की दिशा में काम करना होगा। देश को 2047 तक विकासशील से विकसित देश बनाने का लक्ष्य हमारे सामने है। इसे पूरा करने केे लिए तकनीकी विकास, प्रसार और स्थिरीकरण पर कार्य करना होगा।

By Udaipurviews

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