सात फेरों के सात वचन पर प्रवचन में मुनि सुरेश ने कहा
उदारता के बिना सम्बंधो को दूर तक ले जाना संभव नही है। जिम्मेदारी स्वीकार करना महत्वपूर्ण नहीं है, महत्वपूर्ण है उसे आत्मा से निभाना। यह बात ध्यान साधक शासन श्री मुनि सुरेश कुमार ने रविवारीय प्रवचन “सात फेरो के सात वचन ” विषय पर सम्बोधित करते हुए कही। उन्होंने कहा – शक की सुइ जहा घुमती है वही पति- पत्नी के रिश्ते नारकीय हो जाते हैं जुबान मे मिश्री रखकर बोले तो दाम्पत्य जीवन में कभी दरार नही आयेगी। जितना सम्मान देंगे उतना सम्मान मिलेगा। व्यवस्था घर का श्रृंगार है, संतुष्ट स्त्री लक्ष्मी सुमाधान घर का सुख, प्रेम और श्रद्धा घर की नींव है।
• मुनि सम्बोध कुमार ‘मेधांश’ ने कहा- पति और पत्नी का रिश्ता शरीर का ही नहीं आत्मा का भी है। एक दुसरे की खुशी की परवाह जहा शुरू होती है वही से दाम्पत्य में सुबह दशहरे और रातें दिवाली हो जाती है। “अपेक्षा कम तो उपेक्षा कम” इतना सा जिन्दगी में सीख लेतो दाम्पत्य जीवन तलाख के मोड़ पर खड़ा नहीं होगा। खोया हुआ रुमाल और अदालत में पहुँचे रिश्तें वापिस कभी नहीं लौटते । समर्पण, सहनशीलता, सामंजस्य इन तीन ‘एस’ फेक्टर से वैवाहिक जीवन में खुशहाली उतर आती है। अच्छा दिल और स्वभाव जररूरी है, अच्छे दिल से रिश्ते बनेंगे, अच्छे स्वभाव से जीवन भर टिके रहेंगे।
ते.यु.प कार्यक्रमों के बैनर अनावृत
अखिल भारतीय तेरापंथ युवक परिषद के निर्देशन में तेरापंथ युवक परिषद द्वारा ऑनलाइन सम्यक दर्शन व दिनांक 24 से 30 जुलाई को आयोजय होने वाले बारह व्रत कार्यशाला के बैनर महाप्रज्ञ विहार में शासन श्री मुनि सुरेश कुमार के सान्निहम तेरापंथ भवन में साध्वी डॉ. परमप्रभा जी के सान्निध्य में अ.भा.ते.यु.प सदस्यों व ते.यु.प पदाधिकारीयों द्वारा लोकार्पित किया गया ।
