राजनीतिक जीवन की एक स्मृति
उदयपुर। कांग्रेस की वरिष्ठतम नेता व पूर्व केन्द्रीय मंत्री डॉ. गिरिजा व्यास अपने जीवन में कई बार लोकसभा व विधानसभा के चुनाव लड़ी, उनकी चुनावी यात्रा में 1996 के लोकसभा चुनाव का एक संस्मरण विशेष है, जिसमें उनके प्रतिद्वंद्वी भाजपा प्रत्याशी ने उन्हें विजयी भवः का आशीर्वाद दिया और उस चुनाव में वह विजयी रही।
भाजपा नेता व प्रदेश मीडिया प्रकोष्ठ के पूर्व सदस्य डॉ. विजय विप्लवी ने बताया कि बात 1996 की है। जब गिरिजा व्यास उदयपुर लौकसभा क्षैत्र से कांग्रेस प्रत्याशी थी, उनके सामने भाजपा ने मेवाड़ महामंडलेश्वर महंत मुरली मनोहर शरण को भाजपा प्रत्याशी के रुप में मैदान में उतार दिया। दोनों के मध्य गुरू-शिष्या का सम्बन्ध था। जब प्रचार अभियान के मध्य दोनों आमने सामने हुए तो गिरिजा ने हमेशा की तरह महंत के चरणस्पर्श किये तब महंत ने आशीर्वाद की मुद्रा में कहा “विजयी भवः” । सुनकर साथी कार्यकर्ता विस्मित व किमकर्तव्यविमूढ हो गये। ये वाकया मीडिया में चर्चा का विषय भी बना। जब परिणाम आया तो महंत का आशीर्वाद फलीफूत हुआ, गिरिजा विजयी रही। महंत के शिष्य डॉ. विप्लवी जब उनसे पूछा कि आपने ऐसा आशीर्वाद कैसे दे दिया? तो महंत ने कहा – “वो आशीर्वाद अंतर्मन से निकला, ये शब्द कहां से आये, ईश्वर जाने।” वर्तमान राजनीति में जहां परस्पर द्वेषभाव व असहिष्णुता बढ रही है, इस पीढी के लिये दो प्रतिद्वंद्वी प्रत्याशियों का परस्पर सद्भाव प्रेरणादायक है।
