उदयपुर, 17 अगस्त। केशवनगर स्थित अरिहंत वाटिका में आत्मोदय वर्षावास में हुक्मगच्छाधिपति आचार्य श्री विजयराज जी म.सा. ने शनिवार को धर्मसभा में कहा कि कार्य की सफलता में काल का बहुत बड़ा योगदान होता है। इसलिए आचारांग सूत्र में कहा गया है कि खणं जाणाई पंडिओ अर्थात् जो क्षण को जानता है, जो एक क्षण की भी कीमत करता है वहीं पंडित है। समय में वह शक्ति है जो अच्छे को बुरा व बुरे को अच्छा बनाता है। समय के साथ ही अच्छे लोगों में परिवर्तन, अनुवर्तन, सहवर्तन एवं विवर्तन होता है। आचारांग सूत्र में बताया गया है कि काल की प्रतिलेखना करने पर जीव ज्ञानावरणीय कर्म का क्षय करता है। अनुकूल समय जीवन को बनाता है जबकि प्रतिकूल समय जीवन को बिगाड़ देता है। परिस्थितियां चाहे जो हों हम समय को सार्थक करें। समय की नाजुकता को समझ कर बच्चों की लड़ाई में बड़ों को तथा सास-बहू की लड़ाई में बाप-बेटे को नहीं पड़ना चाहिए। अन्यथा छोटी लड़ाई बड़ा रूप लेकर समाज का बड़ा नुकसान करती है। उपाध्याय श्री जितेश मुनि जी म.सा. ने कहा कि जीवन प्रतिपल जा रहा है। कब बचनपन बीता, जवानी बीती और बुढ़ापा आ गया, पता ही नहीं चला। जीवन की सांझ हो गई है अब तो दिया जलाएं। सांझ होने पर भी दिया नहीं जलाएंगे तो फिर कब दिया जलाएंगे? सांझ होते ही अंधेरा होने लगता है। दीया जलाने से प्रकाश मिलता है। ठीक वैसे ही ज्ञान की ज्योत जगा लेने पर जीवन में उजियारा हो जाता है।
परिस्थितियां चाहे जो हों हम समय को सार्थक करें : आचार्य विजयराज
