उदयपुर। श्री जैन श्वेताम्बर मूर्तिपूजक वासुपूज्य मंदिर, दादाबाड़ी में चल रहे आध्यात्मिक चातुर्मास के अंतर्गत शुक्रवार को आयोजित धर्मसभा में साध्वी डॉ. विद्युतप्रभा श्रीजी आदि ठाणा-6 ने भगवान महावीर के तप, त्याग और आत्मसाधना का स्मरण कराते हुए कहा कि मन पर विजय प्राप्त करना ही जीवन की सबसे बड़ी साधना है। उन्होंने श्रद्धालुओं का आह्वान किया कि वे भगवान महावीर के आदर्शों को केवल सुनें नहीं, बल्कि अपने जीवन में भी उतारने का प्रयास करें।
साध्वी श्रीजी ने कहा कि 2600 वर्ष बाद भी भगवान महावीर का नाम पूरे विश्व में श्रद्धा और आस्था के साथ गूंज रहा है। बिना किसी स्वार्थ और संबंध के करोड़ों लोग आज भी उनका स्मरण करते हैं, जबकि आज का मनुष्य अपने परिवार की कुछ पीढ़ियों के नाम भी याद नहीं रख पाता। उन्होंने कहा कि भगवान महावीर ने लगातार 12 वर्षों तक कठोर तपस्या कर आत्मविजय का मार्ग दिखाया। यदि हम उनके जीवन का मनन करें और आत्मावलोकन करें तो जीवन की दिशा बदल सकती है।
उन्होंने कहा कि हमें स्वयं से यह प्रश्न करना चाहिए कि 24 घंटे में हम आत्मा की चिंता अधिक करते हैं या शरीर की। संसार में सबसे कठिन कार्य अपने मन और भावों पर नियंत्रण पाना है। जिस दिन मन पर विजय प्राप्त हो जाएगी, उसी दिन जीवन का वास्तविक परिवर्तन शुरू होगा।
साध्वी श्रीजी ने कहा कि आज अधिकांश लोग परिस्थितियों के अनुसार उत्तर देते हैं, लेकिन जीवन का वास्तविक उद्देश्य क्या है, इस पर गंभीरता से विचार नहीं करते। उन्होंने प्रश्न किया कि हमारे लिए अधिक मूल्यवान क्या हैकृपरमात्मा की वाणी या संसार का स्वर्ण? उन्होंने कहा कि जब तक परमात्मा की वाणी को जीवन का सर्वोच्च धन नहीं माना जाएगा, तब तक आत्मिक शांति संभव नहीं है। भौतिक शिक्षा और सांसारिक आकर्षण के कारण हम इस सत्य को समझने में पीछे रह गए हैं। संसार रूपी दावानल को शांत करने के लिए परमात्मा की वाणी रूपी अमृत का आश्रय लेना आवश्यक है।
धर्मसभा के प्रारंभ में साध्वी प्रज्ञानजना श्रीजी, साध्वी नमनरुचि श्रीजी, साध्वी योगरुचि श्रीजी एवं साध्वी तन्मयरुचि श्रीजी ने मंगलाचरण एवं प्रेरणादायी गीत प्रस्तुत कर वातावरण को भक्तिमय बना दिया। बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
मन पर विजय ही सच्ची साधना, परमात्मा महावीर के तप से लें प्रेरणाःसाध्वी डॉ.विद्युतप्रभा श्रीजी
