उदयपुर। श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ के तत्वावधान में देवेंद्र धाम स्थित महावीर समवशरण में धर्मसभा आयोजित हुई। इसमें डॉ. सुरेंद्र मुनि ने भक्तामर के माध्यम से भक्ति की महत्ता समझाई।
उन्होंने कहा कि प्रभु की शक्ति असीम है, जबकि मानव की शक्ति सीमित है। इसके बावजूद सच्ची भक्ति मनुष्य के भीतर ऐसी ऊर्जा और आत्मिक शक्ति का संचार करती है, जो उसे कठिन परिस्थितियों का सामना करने का साहस देती है। हिरणी और उसके शावक का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि वात्सल्य के कारण हिरणी अपनी शारीरिक क्षमता से कहीं अधिक साहस जुटाकर शेर का सामना करने दौड़ पड़ती है। इसी प्रकार प्रभु के प्रति समर्पण व्यक्ति के भीतर असीम ऊर्जा उत्पन्न करता है। प्रवर्तक डॉ. राजेंद्र मुनि ने कहा कि सच्ची भक्ति जागृत होने पर मन से अहंकार और छोटे-बड़े का भाव समाप्त हो जाता है। उन्होंने शबरी की निष्काम भक्ति, मीरा के प्रेम-समर्पण और चंदनबाला द्वारा भगवान महावीर को अर्पित उड़द के बाकुलों का उदाहरण दिया।
धर्मसभा में जोधपुर, इंदौर, लुधियाना और मुंबई से आए समाजसेवियों का अभिनंदन किया गया। अध्यक्ष एडवोकेट रोशनलाल जैन एवं महामंत्री हिम्मत बडाला ने सूचनाएं दीं। लाभार्थी परिवार ने आगंतुकों का स्वागत किया।
सच्ची भक्ति से जागती है भीतर की अनंत ऊर्जाःडॉ. सुरेंद्र मुनि
