उदयपुर, 29 मई। नवलखा महल महर्षि दयानंद सरस्वती से संबंधित एक ऐसा ऐतिहासिक स्थल है जहां स्वामी जी ने महान ग्रंथ सत्यार्थ प्रकाश की रचना की और अब उसे आर्य समाज के द्वारा एक बहुत ही सुंदर स्मारक के रूप में इस प्रकार विकसित किया गया है कि यह मानव मूल्यों को स्थापित करने वाला अपने आप में एक विशिष्ट केंद्र बन चुका है । यह विचार जनजाति क्षेत्रीय विकास मंत्री बाबूलाल खराड़ी ने व्यक्त किये।
वे बुधवार को शहर के गुलाब बाग स्थित नवलखा महल का अवलोकन कर रहे थे।
अवलोकन दौरान खराड़ी ने कहा कि यहां की पंच महायज्ञ दीर्घा,भारत गौरव दर्शन, राष्ट्रोन्नायक वीथिका, संस्कार वीथिका, मिनी थियेटर और आर्यावर्त चित्र दीर्घा अध्यात्म और राष्ट्रवाद को समर्पित हैं। किस प्रकार से एक व्यक्ति अपने जीवन में संस्कारों को समाहित करते हुए राष्ट्र ही नहीं विश्व के लिए एक मूल्यवान भूमिका निभा सकता है, इसे सीखना है तो नवलखा महल सांस्कृतिक केंद्र में हर एक को आना चाहिए।
इस दौरान उन्होंने इस स्थान के विकास की दृष्टि से हर प्रकार के सहयोग की भावना भी प्रकट की।
इस अवसर पर श्रीमद दयानंद सत्यार्थ प्रकाश न्यास के अध्यक्ष अशोक आर्य ने मंत्री खराड़ी का स्वागत ओम दुपट्टा और मेवाड़ी पाग से किया, तो वहीं न्यास के जनसंपर्क सचिव विनोद राठौड़ ने ओम दुपट्टा पहना कर अपने स्वागत के भाव प्रकट किये। इस अवसर पर नवलखा महल सांस्कृतिक केंद्र को जीवंत रखने वाला समस्त स्टाफ उपस्थित था।
कार्यक्रम दौरान न्यास की ओर से मंत्री खराड़ी को महर्षि दयानंद सरस्वती जी का कालजई ग्रंथ सत्यार्थ प्रकाश भेंट करने के साथ ही वेद मन्त्रों के सुंदर व्याख्यान स्वरूप श्रुति सौरभ भेंट की गई।
