डॉ अनिल मेहता

झीलों के प्रति दृष्टिकोण को प्लेजर सेंट्रिक नहीं, प्रेयर सेंट्रिक बनाना होगा : झील संरक्षण संवाद

झीलों के प्रति दृष्टिकोण को प्लेजर सेंट्रिक नहीं, प्रेयर सेंट्रिक बनाना होगा : झील संरक्षण संवाद

उदयपुर, 31 मई, झीलें हमारी  सामाजिक,  सांस्कृतिक, पारिस्थितिक और आध्यात्मिक पहचान है।   लेकिन  आज यह  मूल  पहचान खतरे में है। यह चिंता रविवार को मांजी  मंदिर घाट पर हुए संवाद में व्यक्त की गई। संवाद में झील विशेषज्ञ डॉ अनिल मेहता ने कहा कि  झीलों को सदियों से संस्कृति, प्रकृति  और प्रगति के  संगम के रूप में देखा गया है। उनके किनारे व  घाट  सामाजिक, सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक अनुष्ठानों  के केंद्र बने। झीलें जैव विविधता के  पोषण का आधार बनी।  लेकिन झीलों, तालाबों  के प्रति दृष्टिकोण को प्रेयर सेंट्रिक के बजाय केवल और केवल प्लेज़र  सेंट्रिक कर देने से झीलें व …
Read More
error: Content is protected !!