उदयपुर। उदयपुर शहर में ठोकर चौराहा सुनते ही दिलो दिमाग में किसी ठोकर नुमा निशान या स्थल का चित्रण होता है। ठोकर सुनते ही मन में ठोकर को लेकर जिज्ञासा उत्पन्न होने लगती है लेकिन इन दिनों जिम्मेदारों की उदासीनता के चलते ठोकर चौराहा पर उदयपुरवासी वास्तव में चलते फिरते ठोकर ही खा रहे है। संबंधित विभाग के अधिकारियों की लापरवाही के चलते सडक का बुरा हाल हो रहा है। जगह जगह टूटी पडी होकर वहां बडे बडे गडृडे और सडक उबर खाबड हो चुकी है। तिपहिया, दुपहिया वाहन पर सवार लोगों को हर समय हादसे का भय सताता है। चारहिया वाहन भी हिचकिलो खाते गुजरते हैै। यही पर रेलवे मैदान के द्वार के बाहर मुख्य सडक पर जलदाय विभाग की पाइप लाइन पर लॉक चाबी लगी है जहां से जलापूर्ति के समय पानी रिसाव होकर सडक पर बहता रहता है। इस पानी के चलते भी सडक वर्षभर टूट कर क्षतिग्रस्त रहती है जिससे भी दुपहिया वाहन चालक हादसे के शिकार होते रहते है। एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन, यूनिवर्सिटी और मादरी इंडस्ट्रियल एरिया जैसे चार सबसे महत्वपूर्ण लाइफलाइन रूट को जोड़ने वाले इस चौराहे को देखकर लगता है कि विभाग इसे आदर्श ठोकर केंद्र बनाना चाहता है। टूटी सड़कें, जानलेवा गड्ढे और उड़ती धूल को देखकर इस चौराहे के नाम ठोकर सही साबित हो रहा है। जनता यहां रोज टूटी सडक, गडृडों में ठोकर खाकर गिर रही है, गाड़ियां टूट रही हैं। चौराहे पर यातायात व्यवस्था पूरी तरह भगवान भरोसे है। सुबह से शाम तक गाड़ियां रेंगती हैं, जाम का झाम रहता है। लेकिन वहां खड़ी पुलिस का इस अव्यवस्था से कोई लेना-देना नहीं है। व्यवस्था सुधारने की जिम्मेदारी से पल्ला झाड़कर केवल वसूली में जुटना प्रशासन की नीयत पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।
उदयपुर में जिम्मेदारों की उदासीनता से ठोकर चौराहा पर लोग खा रहे ठोकर
