भूमि पूजन के साथ हुआ ‘जगन्नाथ–हनुमान बेड़ी महाआरती’ के विभिन्न अनुष्ठानों का शुभारंभ

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मनुष्य की तरह ही भगवान जगन्नाथ अपने अनुष्ठानों से देते हैं जीवन के संदेश : डॉ. प्रदीप कुमावत
आज ( 16 जुलाई ) होगी भगवान जगन्नाथ–हनुमान बेड़ी’ भव्य महाआरती
उदयपुर 15 जुलाई । अखिल भारतीय नववर्ष समारोह समिति एवं आलोक संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में भगवान श्रीजगन्नाथ की रथयात्रा के आध्यात्मिक, सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक रहस्यों पर आयोजित विशेष वार्ता में आलोक संस्थान के निदेशक डॉ. प्रदीप कुमावत ने कहा कि भगवान श्रीजगन्नाथ केवल आराध्य देव ही नहीं, बल्कि अपने प्रत्येक अनुष्ठान के माध्यम से मानव जीवन को दिशा देने वाले लोकदेव हैं। उनके प्रत्येक उत्सव और परंपरा में गहन आध्यात्मिक एवं सामाजिक संदेश निहित है।
लगभग एक घंटे तक धाराप्रवाह व्याख्यान देते हुए डॉ. कुमावत ने कहा कि भगवान श्रीजगन्नाथ मनुष्यों की तरह ही व्यवहार करते हैं। प्रत्येक बारह वर्ष में होने वाली नवकलेवर परंपरा में वे नया विग्रह धारण करते हैं। पुराने विग्रहों का वैदिक रीति से अंतिम संस्कार किया जाता है तथा दैतापति सेवक इस अवसर पर अपने परिजनों की भाँति शोक एवं मुंडन संस्कार भी करते हैं। यह परंपरा बताती है कि जन्म, परिवर्तन और नश्वरता प्रकृति का शाश्वत नियम है।
डॉ. कुमावत ने कहा कि भगवान जगन्नाथ, श्रीकृष्ण के महाभाव का मूर्त स्वरूप हैं। उनकी रथयात्रा विश्व के सबसे विशाल वार्षिक धार्मिक आयोजनों में से एक है, जिसमें करोड़ों श्रद्धालु सहभागी बनते हैं। उन्होंने बताया कि अंग्रेजी की Oxford Dictionary में भी “Juggernaut” शब्द भगवान जगन्नाथ की विराट रथयात्रा से प्रेरित होकर शामिल किया गया, जिसका अर्थ है—ऐसी विराट एवं अविराम शक्ति, जिसे रोक पाना असंभव हो।
उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि भारत की सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और लोक परंपराओं का अध्ययन करें, उन्हें समझें और उनमें सक्रिय सहभागिता निभाएँ। यही हमारी वास्तविक सांस्कृतिक पहचान और राष्ट्रीय चेतना का आधार है।
इस अवसर पर डॉ. प्रदीप कुमावत द्वारा रचित ‘जगन्नाथ–हनुमान बेड़ी महाआरती’ का लोकार्पण भी किया गया। उपस्थित श्रद्धालुओं ने आरती का सामूहिक वाचन कर भगवान श्रीजगन्नाथ एवं श्रीहनुमानजी के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की।

भूमि पूजन के साथ हुआ ‘जगन्नाथ–हनुमान बेड़ी महाआरती’ के विभिन्न अनुष्ठानों का शुभारंभ
जगन्नाथ पुरी से लाई गई रथ की पवित्र लकड़ी का हुआ कलश में प्रतिष्ठापन, वेदमंत्रों के बीच पृथ्वी पूजन कर मांगी आयोजन की सफलता की कामना
धूलकोट स्थित श्री महावीर हनुमान मंदिर परिसर में गुरुवार को आयोजित होने वाली ऐतिहासिक ‘जगन्नाथ–हनुमान बेड़ी भव्य महाआरती’ के पूर्व विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों का शुभारंभ डॉ प्रदीप कुमावत के मुख्य आतिथ्य मे विधिवत भूमि पूजन के साथ किया गया। वैदिक मंत्रोच्चार, दीप प्रज्वलन एवं पृथ्वी माता के पूजन के साथ आयोजित इस अनुष्ठान में भगवान श्रीजगन्नाथ एवं श्रीहनुमानजी का आशीर्वाद प्राप्त कर आयोजन की सफलता की प्रार्थना की गई।
विशेष आकर्षण यह रहा कि भगवान श्रीजगन्नाथ की (पूजित वस्त्र/चरण-स्पर्शित पवित्र प्रसाद) से हनुमान बेड़ी का पूजन किया गया। साथ ही, श्रीजगन्नाथ पुरी से लाई गई भगवान के रथ की पवित्र लकड़ी को विधिवत पूजन के बाद कलश में स्थापित किया गया। इस अवसर पर महा आरती सयोजक डॉ प्रदीप कुमावत, इस्कॉन मंदिर उदयपुर के मायापुरी वासी जी, सह सयोजक चन्द्रप्रकाश बंसल, हरीश वर्मा, शोभा लाल मेनारिया, रमेश चौधरी, गोपाल कृष्ण दशोरा, सुरेश कुमार वैष्णव सहित कार्यकर्ता उपस्थित थे।

आज ( 16 जुलाई )होगी ‘जगन्नाथ–हनुमान बेड़ी’ भव्य महाआरती
सयोजक डॉ प्रदीप कुमावत ने बताया की इसी क्रम में गुरुवार प्रातः 11:15 बजे अखिल भारतीय नववर्ष समारोह समिति, आलोक संस्थान, आलोक इंटरेक्ट क्लब, श्री महावीर हनुमान मंदिर ट्रस्ट, बोहरा गणेश जी मंदिर विकास प्रन्यास, बजरंग सेना मेवाड़, सर्व समाज, संगठन, स्थानीय निवासियों, व्यापार मंडल द्वारा धूलकोट स्थित श्री महावीर हनुमान मंदिर के बाहर चौराहे पर पहली बार ‘जगन्नाथ–हनुमान बेड़ी’ भव्य महाआरती का आयोजन किया जाएगा। इस विशेष आयोजन में भगवान श्रीजगन्नाथ की ओर से श्रीहनुमानजी को प्रतीकात्मक बेड़ी अर्पित की जाएगी। इसके पश्चात वैदिक मंत्रोच्चार, जयघोष एवं भक्तिमय वातावरण में भव्य महाआरती सम्पन्न होगी।
सह सयोजक श्री महावीर हनुमान मंदिर धुलकोट के सी पी बंसल ने बताया की भगवान जगन्नाथ जी को 151 किलो खिचड़ा का भोग धराया जायेगा।

By Udaipurviews

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