पुण्य की बारिश में भीगना है तो मोह का रेनकोट छोड़ना होगा | उदयपुर
उदयपुर, 8 अगस्त। अरिहंत और सिद्ध हमारे साध्य हैं और वंदित्ता सूत्र उस साध्य को साधने की साधना है। ‘इच्छामि पडिक्कमिउं’ कहकर श्रावक पंच परमेष्ठी की साक्षी में श्रावक धर्म में लगे अतिचारों से पीछे हटने के लिए प्रतिक्रमण करता है। भूलों के लिए क्षमा मांगने हेतु मन का निर्मल होना अत्यंत आवश्यक है। जब मन निर्मल होता है, तब ‘मिच्छामि दुक्कडम्’ कहने के लिए हमारे हाथ स्वत: ही नमस्कार मुद्रा में आ जाते हैं। यह उद्गार मालदास स्ट्रीट स्थित आराधना भवन में चल रही 45 दिवसीय सिद्धि तप आराधना के दौरान आचार्यदेव श्रीमद् विजय प्रशमेशप्रभ सूरीश्वर महाराज ने व्यक्त…
