डिस्पोजल, प्लास्टिक, शराब की बोतलें और पटाखों का कचरा हटाया
झील की वहन क्षमता से अधिक बढ़ती गतिविधियों पर चिंता जताई
रानी रोड पर नाइट मार्केट बना तो फतेहसागर बन जाएगा डंप यार्ड, खत्म हो जाएगी जैव विविधता
उदयपुर, 20 सितंबर। विश्व सफाई दिवस, वर्ल्ड क्लीनअप डे , 20 सितंबर के अवसर पर रविवार को झील प्रेमियों ने रानी रोड स्थित फतेहसागर झील पेटे में श्रमदान कर बड़ी मात्रा में प्लास्टिक, पॉलीथिन, डिस्पोजल, चाट-पकौड़ी के अवशेष, शराब की बोतलें, पटाखों के खोल तथा अन्य ठोस कचरे को हटाया। झील प्रेमियों ने चिंता जताई कि झील किनारे बढ़ती व्यावसायिक और पर्यटन गतिविधियां झील की सहन व वहन क्षमता से आगे निकल रही है। यह एक गंभीर खतरा है।
झील प्रेमियों ने नगर निगम और उदयपुर विकास प्राधिकरण से रानी रोड पर प्रस्तावित नाइट मार्केट के विचार को त्याग देने का आग्रह दोहराया।
झील विशेषज्ञ डॉ. अनिल मेहता ने कहा कि फतेहसागर में पहुंच रहा कचरा जल गुणवत्ता, पेयजल सुरक्षा और जलीय पारिस्थितिकी पर संकट है। खाद्य एवं अन्य जैविक कचरे के विघटन से शैवाल( काई ) तथा खरपतवार वृद्धि बढ़ रही है। इससे झील में घुलित ऑक्सीजन कम होने और मछलियों के मरने की संभावना बढ़ गई है। ऐसे में व्यावसायिक गतिविधियों का और विस्तार कर फतेहसागर जैसे वेटलैंड किनारे यदि नाइट मार्केट बनता है तो यह न्यायालयी निर्देशों की खुली अवेहलना भी होगी।
झील विकास प्राधिकरण के पूर्व सदस्य तेज शंकर पालीवाल ने कहा कि झील पेटा कचरा पेटी नहीं है। झील के पेटे में पहुंच रहा प्लास्टिक और अन्य कचरा पेयजल सुरक्षा तथा जैव विविधता दोनों के लिए चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि फतेहसागर को जैव-विविधता धरोहर के रूप में संरक्षित करने की जरूरत है। नागरिकों को भी इसमें अपनी भूमिका निभानी होगी।
सामाजिक कार्यकर्ता नंद किशोर शर्मा ने कहा कि झील किनारे व्यावसायिक गतिविधियां बढ़ाने से पेयजल गुणवत्ता पर दुष्प्रभाव होगा। उन्होंने कहा कि झील का किनारा कचरा रखने की जगह नहीं हो सकता। फतेहसागर का केिनारा पर्यटन गतिविधियों का विस्तार क्षेत्र नहीं, बल्कि झील की प्राकृतिक सुरक्षा सीमा है।
शिक्षाविद कुशल रावल ने कहा कि रानी रोड पर बढ़ता यातायात और भीड़ वायु, ध्वनि तथा सड़क प्रदूषण के साथ साथ झील के आसपास के पक्षी आवासों पर दबाव बढ़ा रहा है। यह इस क्षेत्र की पर्यावरणीय वहन क्षमता के विपरीत है।
युवा झील प्रेमी विनोद कुमावत तथा वरिष्ठ नागरिक द्रुपद सिंह ने कहा कि उदयपुर की अर्थव्यवस्था , स्वास्थ्य और पहचान झीलों से जुड़ी है। झील को बचाना, कचरा व गंदगी मुक्त रखना केवल पर्यावरण संरक्षण नहीं, बल्कि शहर के भविष्य और पर्यटन व्यवसाय की सुरक्षा भी है
