गोगुंदा। कस्बे के ब्रह्मपुरी स्थित स्थानकवासी जैन स्थानक में रविवार को आध्यात्मिक चातुर्मास के तहत धर्मसभा हुई। इसमें श्रमण संघीय आचार्य सम्राट शिवमुनिजी महाराज साहब की 85वीं जन्म जयंती श्रद्धा व उत्साह के साथ मनाई गई। धर्मसभा में साधु-साध्वियों ने आचार्य शिवमुनिजी के जीवन, तप, ज्ञान, साधना और आध्यात्मिक चिंतन पर प्रकाश डालते हुए उनके जीवन से प्रेरणा लेने का आह्वान किया और उनके अच्छे स्वास्थ्य और दीर्घायु की मंगल कामना की।
महाश्रमण जिनेन्द्र मुनि काव्यतीर्थ ने अपने प्रवचन कहा कि आचार्य शिवमुनिजी महाराज साहब का जीवन आध्यात्म, तप और साधना का प्रेरणास्रोत रहा है। उन्होंने श्रद्धालुओं को संयम एवं सदाचार के साथ धर्ममय जीवन जीने का संदेश दिया। साध्वी राजश्रीजी ने भजन प्रस्तुति के साथ धर्मसभा का शुभारंभ किया। उन्होंने आचार्य शिवमुनिजी की साधना एवं आध्यात्मिक जीवन के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला। साध्वी सुलक्षणा प्रभाजी ने भी आचार्य की जीवनी एवं उनके आध्यात्मिक योगदान के बारे में बताया। इस अवसर पर धर्मसभा में 13 की तपस्या करने वाली यशोदा सेठ एवं 9 की तपस्या करने वाली वनिता सेठ तथा उनके परिवारजनों का जैन समाज की ओर से शॉल एवं माला पहनाकर स्वागत किया गया। धर्मसभा के संयोजक सुनील लोढ़ा ने बाहर से आए अतिथियों एवं श्रद्धालुओं का स्वागत किया।
गुरुदेव जिनेन्द्र मुनि ने मंगल पाठ सुनाया। उन्होंने कहा कि चातुर्मास के दौरान नियमित प्रवचन जारी हैं। श्रद्धालुओं को धर्म, संयम और सदाचार के मार्ग पर आगे बढ़ने का संदेश दिया। धर्मसभा में बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाओं ने उपस्थित होकर प्रवचन का लाभ लिया।
आचार्य शिवमुनिजी की 85वीं जन्म जयंती मनाई, साधना और संयम का दिया संदेश
