रानी रोड स्थित महाकालेश्वर मंदिर की आराजी 5 और वर्तमान आराजी 42 की हुई नपती, ईटीएस मशीन से तय की गई वास्तविक सीमा
उदयपुर।रानी रोड स्थित श्री महाकालेश्वर महादेव मंदिर की भूमि की वास्तविक सीमा तय करने के लिए सोमवार को न्यायालय के आदेश पर वैज्ञानिक एवं तकनीकी तरीके से पैमाइश की गई। खास बात यह रही कि न्यायालय में चल रहे मामले में स्वयंश्री 1008 भगवान मंदिर मूर्ति श्री महाकालेश्वर जी महादेवको पक्षकार बनाया गया है। ऐसे में कोर्ट कमीश्नर द्वारा भगवान महाकालेश्वर की मौजूदगी में उनकी ही भूमि की ईटीएस मशीनए ड्रोन से वास्तविक सीमाए मंदिर भूमि पर अवैध अतिक्रमण चिन्हित करनेए क्षैत्राधिकार की मौके की वास्तविक स्थिति की जानकारी करने हेतु नपती की कार्रवाई प्रारम्भ हुई।
सिविल न्यायालयए शहर उत्तर उदयपुर के 24 जुलाई 2026 के आदेश की पालना में सोमवार सुबह 11 बजे मंदिर परिसर में कोर्ट कमिश्नर एवं प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में पैमाइश शुरू की गई। इस दौरानसाबिक आराजी संख्या 5 और वर्तमान आराजी संख्या 42की मौके पर वास्तविक सीमाए क्षेत्रफल एवं भौतिक स्थिति का वैज्ञानिक उपकरणों की सहायता से निर्धारण किया गया। मौके की स्थिति को दर्ज करने के लिए फोटोग्राफ भी लिए गए।
ईटीएस मशीन से हुई वैज्ञानिक पैमाइश : न्यायालय की ओर से नियुक्त कोर्ट कमिश्नरराजेश कुमार उपाध्यायकी देखरेख में भू.अभिलेख निरीक्षक तथा अन्य तकनीकी कार्मिकों की मौजूदगी में पैमाइश की गई। नपती के दौरानईटीएस मशीन एवं अन्य वैज्ञानिक उपकरणोंका उपयोग किया गया। इन उपकरणों के माध्यम से राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज भूमि की सीमाओं का मौके की वास्तविक स्थिति से तकनीकी मिलान किया गया।
कोर्ट कमिश्नर की ओर से 13 अगस्त को जारी सूचना में सभी संबंधित पक्षकारों को आवश्यक दस्तावेजों के साथ मौके पर उपस्थित रहने के निर्देश दिए गए थे। न्यायालय के आदेश के अनुसार पैमाइश के साथ स्थल की वर्तमान स्थिति को फोटोग्राफ के माध्यम से भी दर्ज किया गया।
1954 के आदेश और 1975 के फैसले का हवाला : मंदिर पक्ष की ओर से न्यायालय में प्रस्तुत दस्तावेजों में भूमि के स्वामित्व एवं आधिपत्य को लेकर13 दिसंबर 1954 के एडीशनल सेटलमेंट कमिश्नर, राजस्थानए जयपुर के आदेशका हवाला दिया गया है। दस्तावेजों के अनुसार साबिक आराजी संख्या 5 के आसपास की बिलानाम एवं पड़त भूमिए जो कोट और बाड़ से मेहदूद बताई गई हैए उसे महाकालेश्वर महादेव जी की भूमि होने का उल्लेख नोट खाना कैफियत में दर्ज किया गया था।
मंदिर पक्ष की ओर से यह भी बताया गया है कि उक्त आदेश की पुष्टिराजस्व मंडलए अजमेर के 30 मई 1975 के निर्णयमें की गई थी। इसी आधार पर साबिक आराजी संख्या 5 और वर्तमान आराजी संख्या 42 को मंदिर मूर्ति की भूमि बताया गया है।
रिपोर्ट में स्पष्ट होगी भूमि की वास्तविक स्थिति : पैमाइश और स्थल निरीक्षण के बाद कोर्ट कमिश्नर की ओर से न्यायालय में रिपोर्ट प्रस्तुत की जाएगी। रिपोर्ट में राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज भूमि की सीमाए मौके पर उपलब्ध वास्तविक स्थितिए क्षेत्रफल तथा स्थल के फोटोग्राफ सहित तकनीकी विवरण शामिल किए जाएंगे। इससे न्यायालय के समक्ष राजस्व रिकॉर्ड और मौके की स्थिति का तुलनात्मक एवं वैज्ञानिक आधार पर आकलन हो सकेगा।
कोर्ट कमिश्नर राजेश कुमार उपाध्याय ने बताया कि सभी संबंधित पक्षकारों को साबिक आराजी संख्या 5 एवं वर्तमान आराजी संख्या 42 से संबंधित दस्तावेजों के साथ मौके पर उपस्थित रहने के लिए कहा गया था। पैमाइश के दौरान वैज्ञानिक उपकरणों से भूमि की सीमा निर्धारित करने के साथ मौके की वास्तविक स्थिति को भी दर्ज किया गया है।
यह है पूरा मामला
सिविल न्यायालयए शहर उत्तर मेंप्रदीप आमेटा, देवेंद्र पाल सिंह एवं कैलाश चंद्र गायरीकी ओर से अधिवक्ता प्रकाशचंद्र पालीवाल के माध्यम से दावा प्रस्तुत किया गया था। इसमें मंदिर भूमि की आधुनिक एवं वैज्ञानिक संसाधनों से पैमाइश कराने की मांग की गई थी। न्यायालय ने मंदिर भूमि की वास्तविक सीमा एवं मौके की स्थिति को फोटोग्राफ सहित दर्ज कराने के लिए कोर्ट कमिश्नर नियुक्त किए।
मामले मेंकलक्टर, तहसीलदार गिर्वा, सार्वजनिक प्रन्यास मंदिर श्री महाकालेश्वर रानी रोड के अध्यक्ष तेज सिंह सरूपरिया एवं सचिव चंद्रशेखर दाधीच को विपक्षी पक्षकार बनाया गया है। उनकी ओर से अधिवक्ता अशोक सिंघवी एवं सुरेशचंद्र नागोरी भी मौके की कार्रवाई में उपस्थित रहे।
न्यायालय के आदेश पर हुई इस वैज्ञानिक पैमाइश को मंदिर भूमि की सीमा एवं मौके की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने की दिशा में महत्वपूर्ण कार्रवाई माना जा रहा है। अब कोर्ट कमिश्नर की रिपोर्ट के बाद मामले में भूमि से जुड़े तथ्यों की स्थिति न्यायालय के समक्ष और अधिक स्पष्ट होने की उम्मीद है। कोर्ट कमीश्नर के अनुसार पैमाईश कार्य दो तीन दिन रहने की संभावना है।
भगवान महाकालेश्वर की मौजूदगी में हुई मंदिर भूमि की वैज्ञानिक पैमाइश
