मंदिर में प्रवेश करने पर हमें पांच अभिगम का पालन करना चाहिए : साध्वी प्रफुल्लप्रभा

उदयपुर व्यूज़ | ताजा खबरें

– साध्वियों के सानिध्य में अष्ट प्रकार की पूजा-अर्चना की  
– आयड़ जैन तीर्थ में चातुर्मासिक प्रवचनों की श्रृृंखला जारी  

उदयपुर 31 अगस्त। श्री जैन श्वेताम्बर महासभा के तत्वावधान में तपागच्छ की उद्गम स्थली आयड़ तीर्थ पर बरखेड़ा तीर्थ द्वारिका शासन दीपिका महत्ता गुरू माता सुमंगलाश्री की शिष्या साध्वी प्रफुल्लप्रभाश्री एवं वैराग्य पूर्णाश्री आदि साध्वियों के सानिध्य में गुरुवार को रक्षा बंधन पूर्व धूमधाम से मनाया गया। महासभा के महामंत्री कुलदीप नाहर ने बताया कि आयड़ तीर्थ के आत्म वल्लभ सभागार में सुबह 7 बजे दोनों साध्वियों के सानिध्य में आरती, मंगल दीपक, सुबह सर्व औषधी से महाअभिषेक एवं अष्ट प्रकार की पूजा-अर्चना की गई।   चातुर्मास संयोजक अशोक जैन ने बताया कि साध्वी प्रफुल्लप्रभाश्री व वैराग्यपूर्णा ने जिन मंदिर में प्रवेश करते समय हमें किन किन बातों का ख्याल रखना चाहिये? इसके बारे में जानकारी देते हुए बताया कि दुनिया के प्रत्येक क्षेत्र में विनय की प्रधानता है. चाहे नगरपालिका हो, पंचायत हो, कचहरी हो या पार्लमेन्ट, चाहे अस्पताल हो या कोलेज इन सब स्थानों में जाने से पूर्व हम कितनी सावधानियां बरतते है वैसे ही परमात्मा के राज दरबार में प्रवेश करते वक्त मर्यारा का विधि का ध्यान रखना चाहिये, अज्ञानता को दूर करके ज्ञान का प्रकाश फैलाने वाले विनय सहित प्रवेश करें। इसके लिए पांच प्रकार के अभिगम बताये है। सचित्र सा त्याग यानि मंदिर में प्रवेश करते वक्त राजचिठन, मुकुट, साफा, . जुते, जेब में रखे गये मुखवास तम्बाकू, दया आदि समस्त पदार्थ मंदिर में प्रवेश के पूर्व त्याग कर देना चाहिए। पेढी पर रख दे या चौकीदार को सौंप कर जाना चाहिए। अचित का अत्याग यानि परमात्मा की पूजा के लिए धूप दीप अक्षत फूल, फल जल आदि वस्तुओं को स्वीकार करके प्रवेश करना। उत्तरासन यानि पुरुष को मंदिर में प्रवेश के पूर्व उत्तरासन अर्थात खेस द्वारा अपने शरीर को अलंकृत करना। अंजलि मानि जिजेश्वर परमात्मा की मुखाकृति देखते ही दोनों हाथ जोड़ कर मस्तक झुकाकर, नमो जिन शासन कहना। प्रणिधान यानि मन की एकाग्रता आधिव्याधि: उपाधि से संतत आत्मा को परमात्मा मिल जाये फिर क्या चाहिए। महासभा अध्यक्ष तेजसिंह बोल्या ने बताया कि आयड़ जैन तीर्थ पर प्रतिदिन सुबह 9.15 बजे से चातुर्मासिक प्रवचनों की श्रृंखला में धर्म ज्ञान गंगा अनवरत बह रही है।

By Udaipurviews

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