अरावली संरक्षण के साथ उत्तरदायी खनन जरूरीःएमईएआई

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उच्चाधिकार प्राप्त समिति के समक्ष वैज्ञानिक सीमांकन, संवेदनशील क्षेत्रों को ‘नो-गो जोन’ रखने का सुझाव
उदयपुर, 10 अगस्त। जिला प्रशासन की ओर से आयोजित अरावली पहाड़ियों एवं पर्वत श्रृंखलाओं से संबंधित हितधारक परामर्श कार्यक्रम में माइनिंग इंजीनियर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एमईएआई), राजस्थान चैप्टर-उदयपुर ने खनन अभियांत्रिकी एवं भू-विज्ञान समुदाय का प्रतिनिधित्व किया।
एमईएआई राजस्थान चैप्टर-उदयपुर के सचिव डॉ. हितांशु कौशल ने उच्चाधिकार प्राप्त समिति के समक्ष अरावली के वैज्ञानिक सीमांकन, पर्यावरण संरक्षण एवं जिम्मेदार खनन को लेकर तकनीकी सुझाव प्रस्तुत किए। उनके साथ आर.सी. पुरोहित, एम.एस. पालीवाल, श्यामलाल सुखवाल एवं पी.आर. आमेटा सहित चैप्टर के अन्य सदस्य मौजूद रहे।
डॉ. कौशल ने कहा कि अरावली जैसी प्राचीन भू-वैज्ञानिक संरचना को केवल ऊंचाई, ढलान या दो पहाड़ियों के बीच की दूरी के आधार पर परिभाषित नहीं किया जा सकता। इसके लिए उच्च गुणवत्ता वाले डिजिटल ऊंचाई मानचित्र, भू-विज्ञान, खनिज क्षेत्रों, भूजल पुनर्भरण, वन, वन्यजीव गलियारों, भूमि उपयोग एवं मौजूदा खनन पट्टों के आधार पर समेकित मानचित्रण और जमीनी सत्यापन आवश्यक है।
एमईएआई ने संरक्षित वन, वन्यजीव क्षेत्र, पर्यावरण संवेदनशील क्षेत्र, जलस्रोत, भूजल पुनर्भरण क्षेत्र एवं संवेदनशील पहाड़ियों को ‘नो-गो क्षेत्र’ घोषित करने का सुझाव दिया। वहीं वैज्ञानिक रूप से चिन्हित खनिज क्षेत्रों में विशेषज्ञों की जांच, सभी वैधानिक स्वीकृतियों एवं निरंतर निगरानी के बाद ही नियंत्रित खनन की अनुमति देने की बात कही।
प्रस्तुति में बताया गया कि 20 सूचीबद्ध अरावली जिलों के करीब 1,29,766 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में रिपोर्टेड खनन क्षेत्र लगभग 1.007 प्रतिशत है। एमईएआई ने खनन योग्य खनिज क्षेत्रों में अधिकतम 3 से 4 प्रतिशत सीमा रखने का सुझाव दिया, ताकि अरावली क्षेत्र का कम से कम 95 प्रतिशत हिस्सा खनन से सुरक्षित रखा जा सके।
डॉ. कौशल ने अवैध खनन के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति की आवश्यकता बताते हुए कहा कि सभी वैधानिक अनुमतियों एवं पर्यावरणीय सुरक्षा मानकों के साथ होने वाले वैज्ञानिक एवं वैध खनन को अवैध खनन के समान नहीं माना जाना चाहिए। उन्होंने खनन से मिलने वाले रोजगार, स्थानीय अर्थव्यवस्था और जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट (डीएमएफटी) के सामाजिक योगदान को भी रेखांकित किया।
एमईएआई राजस्थान चैप्टर-उदयपुर ने उच्चाधिकार प्राप्त समिति की तकनीकी सलाह एवं वैज्ञानिक मानचित्रण प्रक्रिया में अपनी विशेषज्ञता और मैदानी अनुभव उपलब्ध कराने की पेशकश की।

By Udaipurviews

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