उदयपुर। सत्रहवीं सदी के विश्वप्रसिद्ध ऐतिहासिक उदयपुर के जगदीश मंदिर में भगवान श्री जगन्नाथ स्वामी का 371 वां पाटोत्सव शुक्रवार को बड़े धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर मंदिर प्रांगण में अस्सी साल बाद विष्णु महायज्ञ भी हुआ। वैशाख की बुद्ध पूर्णिमा पर मंदिर की ध्वजा भी बदली गई।
मंदिर के पुजारी हेमेंद्र ने बताया कि यह आयोजन 371 वर्ष से लगातार मनाया जा रहा है, परंतु इस वर्ष इस समारोह को भव्यता देने के लिए साथ में विष्णु महायज्ञ का भी आयोजन किया गया। सात दिवसीय विष्णु महायज्ञ की शुक्रवार को पूर्णाहुति हुई। इससे पहले शुक्रवार सुबह मंदिर के 125 फीट उंचे शिविर पर ध्वजा बदली गई। विष्णु महायज्ञ की पूर्णाहुति के बाद विशाल भंडारे का भी आयोजन किया गया, जिसमें 50 हजार से अधिक लोगों के प्रसादी पाई।
महाराणा जगत सिंह ने कराया निर्माण
उदयपुर के जगदीश मंदिर का निर्माण तत्कालीन महाराणा जगत सिंह ने सन् 1651 में करवाया था। उस समय उदयपुर मेवाड़ की राजधानी था। चार सौ वर्ष पुराना यह मंदिर उदयपुर का सबसे बड़ा मंदिर है और इसमें पत्थर पर बेहद ही बारीकी से काम है। मंदिर में प्रतिष्ठापित चार हाथ वाली विष्णु की छवि काले पत्थर से बनी है। इस मंदिर के निर्माण को लेकर एक कहानी है, जिसके अनुसार एक संत के द्वारा महाराणा जगन्नाथ को आशीर्वाद था कि वे प्रतिरोज पुरी स्थित जगन्नाथ स्वामी के दर्शन करेंगे। किन्तु किन्हीं कारणवश एक दिन यह नियम टूटा और उसी संत के कहने पर उन्हेांने यहां भगवान जगन्नाथ का भव्य मंदिर का निर्माण कराया। इस मंदिर की प्रतिमा स्वयंभू है और मेवाड़ वासियों के आस्था का केंद्र भी है।
उदयपुर के जगदीश मंदिर में मनाया पाटोत्सव, 80 साल बाद हुआ विष्णु महायज्ञ
