मन का मालिक वही, जो इच्छाओं का गुलाम नहींःसाध्वी विद्युतप्रभा श्रीजी

उदयपुर व्यूज़ | ताजा खबरें

आज्ञा की आराधना से मिलता है शिवत्व, निराधना बढ़ाती है संसार की यात्रा
उदयपुर। वासुपूज्य मंदिर दादाबाड़ी में आयोजित आध्यात्मिक प्रवचन में साध्वी विद्युतप्रभा श्रीजी आदि ठाणा-6 ने कहा कि केवल्य ज्ञान की प्राप्ति के बाद परमात्मा ने चतुर्विध संघ की स्थापना की और अनंत आत्माओं ने सिद्ध पद प्राप्त किया। उन्होंने श्रावक-श्राविकाओं से आह्वान किया कि वे आत्मचिंतन करें कि उनके मन में जिन शासन के प्रति कितनी निष्ठा है। जिन शासन को यदि हृदय में स्थापित कर लिया जाए तो आत्मा की यात्रा को निश्चित रूप से मंजिल मिल सकती है।
साध्वी श्रीजी ने कहा कि आज्ञा की आराधना शिवत्व प्रदान करने वाली और कल्याणकारी है, जबकि आज्ञा की निराधना संसार के भ्रमण को बढ़ाने वाली है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी यदि अध्यापकों की आज्ञा का पालन करे तो वह शिक्षा के क्षेत्र में निरंतर आगे बढ़ता है। जीवन में सफलता के लिए अनुशासन और आज्ञापालन का विशेष महत्व है। आज परिस्थितियां बदल गई हैं, कई बार व्यक्ति को अपने स्टाफ की बात माननी पड़ती है।
उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति आत्मनिर्भर नहीं है और अपना कार्य स्वयं नहीं कर सकता, वह नौकरों का मालिक नहीं बल्कि उनका गुलाम बन जाता है। वास्तविक स्वतंत्रता अपने कार्य स्वयं करने और अपने मन पर नियंत्रण रखने में है।
साध्वी विद्युतप्रभा श्रीजी ने कहा कि संसार के क्षेत्र में कोई अंतिम मंजिल नहीं होती, जबकि अध्यात्म के क्षेत्र में मंजिल निश्चित होती है। परमात्मा की आज्ञा है कि संसार का त्याग करो और यदि तत्काल संसार नहीं छोड़ सकते तो कम से कम संसार छोड़ने की इच्छा निरंतर बनाए रखो। संसार छोड़ने के लिए केवल इच्छा ही नहीं, बल्कि शक्ति और योग्यता दोनों आवश्यक हैं।
उन्होंने कहा कि जो अपने मन का मालिक है, उसे किसी की गुलामी नहीं करनी पड़ती। वास्तविक अमीरी धन-संपत्ति में नहीं, बल्कि मोह, लोभ और इच्छाओं से मुक्ति में है। जिसके भीतर इच्छाओं का अंत नहीं, वह कितना भी धनवान हो, भीतर से गरीब ही है। इंद्रियों और इच्छाओं का गुलाम व्यक्ति सदैव किसी न किसी बंधन में रहता है, जबकि इच्छाओं पर विजय प्राप्त करने वाला व्यक्ति ही वास्तविक स्वतंत्रता का अनुभव करता है।
साध्वी श्रीजी ने कहा कि जीवन का उद्देश्य केवल सांसारिक सुख-सुविधाओं का संग्रह करना नहीं, बल्कि आत्मकल्याण की दिशा में आगे बढ़ना होना चाहिए। जिन शासन की आज्ञाओं को जीवन में उतारकर व्यक्ति अपने भीतर संयम, अनुशासन और वैराग्य का विकास कर सकता है।
धर्मसभा में साध्वी प्रज्ञानजना श्रीजी, साध्वी नमन रुचि श्रीजी, साध्वी योगरुचि श्रीजी एवं साध्वी तन्मय रुचि श्रीजी ने भावपूर्ण गीत प्रस्तुत किया। गीत की प्रस्तुति से धर्मसभा का वातावरण भक्तिमय हो गया।

By Udaipurviews

Related Posts

error: Content is protected !!