उदयपुर, 27 अक्टूबर 2026। महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, उदयपुर के सामुदायिक एवं व्यावहारिक विज्ञान महाविद्यालय द्वारा राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के अंतर्गत संचालित परियोजना “मेवाड़ की परंपरागत फसलों के प्रसंस्करण हेतु उत्कृष्टता केंद्र की स्थापना” के तहत उदयपुर के ब्राह्मणों का गुड़ा गांव में पांच दिवसीय मिलेट आधारित उत्पाद निर्माण, मूल्य संवर्धन एवं उद्यमिता विकास प्रशिक्षण आयोजित किया गया। इस प्रशिक्षण के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को पारंपरिक अनाजों से पौष्टिक खाद्य उत्पाद तैयार करने तथा स्वरोजगार के माध्यम से आत्मनिर्भर बनने की तकनीकों का व्यावहारिक ज्ञान प्रदान किया गया।
प्रशिक्षण के दौरान महिलाओं को हल्दी मुखवास, मोरिंगा मिलेट बाइट्स, राजगिरा चकली, रागी चॉकलेट, मिलेट इंस्टेंट ग्रेवी मिक्स, मिलेट चटनी मिक्स एवं सांवा के गाठिये सहित विभिन्न नवाचारपूर्ण मिलेट आधारित उत्पाद तैयार करने की विधियां सिखाई गई । इन उत्पादों के माध्यम से महिलाओं को पारंपरिक अनाजों के विविध उपयोगों तथा उन्हें आधुनिक खाद्य उत्पादों के रूप में विकसित करने की संभावनाओं से परिचित कराया गया।
प्रशिक्षण में उत्पाद निर्माण के साथ-साथ खाद्य उद्यम स्थापित करने की प्रक्रिया पर भी विशेष ध्यान दिया गया। महिलाओं को खाद्य स्वच्छता, उत्पादों की गुणवत्ता बनाए रखने, आकर्षक पैकेजिंग, लेबलिंग, ब्रांडिंग, लागत निर्धारण तथा विपणन से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी दी गई । उन्हें बताया गया कि स्थानीय स्तर पर उपलब्ध मिलेट्स एवं अन्य पारंपरिक खाद्य सामग्रियों का उपयोग करके कम लागत में मूल्य संवर्धित उत्पाद तैयार किए जा सकते हैं। उचित गुणवत्ता, आकर्षक पैकेजिंग और प्रभावी विपणन के माध्यम से इन उत्पादों को बाजार में उपलब्ध कराकर आय के नए स्रोत विकसित किए जा सकते हैं।
विश्वविद्यालय के निदेशक अनुसंधान डॉ. मनोज कुमार महला ने पारंपरिक फसलों के प्रसंस्करण एवं मूल्य संवर्धन को बढ़ावा देने तथा कृषि आधारित उत्पादों के माध्यम से ग्रामीण आजीविका के अवसर विकसित करने के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों को स्थानीय संसाधनों के बेहतर उपयोग, कौशल विकास और कृषि आधारित उद्यमिता को प्रोत्साहित करने की दिशा में महत्वपूर्ण बताया।
परियोजना की प्रधान अन्वेषक डॉ. कमला महाजनी के नेतृत्व में आयोजित इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को मेवाड़ क्षेत्र में उपलब्ध पारंपरिक अनाजों के बेहतर उपयोग, उनसे विविध खाद्य उत्पाद तैयार करने तथा उन्हें व्यावसायिक रूप देने की तकनीकों से अवगत कराना था। कार्यक्रम के माध्यम से महिलाओं की कार्यकुशलता को निखारने, उनमें उद्यमशीलता की भावना विकसित करने तथा स्थानीय संसाधनों के आधार पर आय अर्जित करने के अवसरों को बढ़ावा देने पर विशेष बल दिया गया।
यह प्रशिक्षण ग्रामीण महिलाओं के लिए पारंपरिक अनाजों को आय और रोजगार के नए अवसरों में बदलने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल रही। मिलेट आधारित उत्पाद निर्माण, खाद्य गुणवत्ता, आकर्षक पैकेजिंग और विपणन का व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त कर महिलाएं भविष्य में अपने छोटे खाद्य व्यवसाय स्थापित करने की दिशा में आगे बढ़ सकती हैं। इस प्रकार यह पहल महिला सशक्तिकरण, पोषण जागरूकता, पारंपरिक फसलों के संरक्षण तथा ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा देने में सार्थक योगदान दे रही है।
